अवैध क्लीनिक चलाने के आरोपी डॉक्टरों की जमानत याचिका कैंसिल

नई दिल्ली। दिल्ली कोर्ट ने बिना लाइसेंस के अवैध क्लीनिक चलाने के आरोपी फर्जी डॉक्टरों को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने डॉक्टर नीरज अग्रवाल, जसप्रीत समेत 3 लोगों की रिट कैंसिल की है।

यह है मामला

दक्षिणी दिल्ली के ग्रेटर कैलाश पार्ट-1 स्थित एक क्लीनिक में 15 नवंबर को फर्जी डिग्री के साथ एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया था। यह डॉक्टर मेडिकल सेंटर में वरिष्ठ सर्जन के तौर पर काम करता था। वह बड़ी संख्या में सर्जरी कर चुका था। ग्रेटर कैलाश थाना पुलिस को इसके खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थी। करीब एक सप्ताह पहले हुई एक मौत के बाद मेडिकल सेंटर में मरीज के परिजनों ने हंगामा किया था। इसके बाद पूरा मामला सामने आया। पुलिस ने मेडिकल सेंटर के संचालक सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया था।

फर्जी एमबीबीएस की डिग्री पर चला रहा था क्लीनिक

पुलिस के अनुसार आरोपी महेन्द्र दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में वरिष्ठ डॉक्टर के पास टैक्निशियन का काम करता था। वहां उसने डॉक्टर को सर्जरी करते हुए देखकर काम सीख लिया। इसके बाद उसने फर्जी एमबीबीएस की डिग्री तैयार करवाई और मेडिकल सेंटर चलाने लगा। मेडिकल सेंटर प्रबंधन महेन्द्र को ऑन कॉल सर्जरी करने के लिए बुलाते थे। पुलिस इसकी जांच कर रही है कि महेन्द्र ने फर्जी डिग्री कहां से बनवाई और यह कहां-कहां लोगों का इलाज कर रहा था।

पकड़ा गया था रैकेट 

फर्जी डॉक्टर के रैकेट से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस ने अदालत में रिपोर्ट दाखिल की। ग्रेटर कैलाश एक थाना पुलिस ने अदालत में फर्जी डॉक्टर द्वारा ऑपरेशन के मामले में जांच रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि क्लीनिक के संचालक नीरज अग्रवाल के खिलाफ पहले से तीन आपराधिक केस दर्ज हैं। उसके क्लीनिक का चार बार दिल्ली मेडिकल काउंसिल द्वारा इलाज में लापरवाही के चलते लाइसेंस कैंसिल किया जा चुका है। इसके बावजूद भी आरोपी क्लीनिक को चला रहा था।

क्लीनिक के खिलाफ मिल चुकी सात बार शिकायतें

दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया कि अग्रवाल मेडिकल सेंटर के नाम से चल रहे इस क्लीनिक के खिलाफ सात बार पहले भी शिकायतें मिल चुकी हैं। ये शिकयतें दिल्ली मेडिकल कांउसिल को मिलीं। यह क्लीनिक कई सालों से चल रहा था। इन वर्षों में डॉक्टरी के पेशे से अलग आरोपियों ने कई लोगों का ऑपरेशन किया है। इन अप्रशिक्षित लोगों के हाथों कितनी जानें गई, इसका पता लगाना जरूरी है। आरोपी नीरज अग्रवाल पेशे से डॉक्टर है, लेकिन आदतन अपराधी भी है। वह इस रैकेट का मुख्य साजिशकर्ता है। यह रैकेट गरीब और कम पढ़े-लिखे लोगों को अपना निशाना बनाता था।

कोर्ट ने नहीं दी राहत

कोर्ट ने पुलिस द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए आरोपियों का जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि समाज में डॉक्टरों को काफी सम्मान दिया जाता है। अधिक लाभ कमाने के चक्कर में आरोपी बड़े पैमाने पर समाज के लिए खतरा हैं। किसी के जीवन को खतरे में डालने वाले चिकित्सा पेशेवर के प्रति नरमी नहीं बरती जा सकती। कोर्ट ने पुलिस की रिपोर्ट के मद्देनजर डॉक्टर नीरज अग्रवाल, डॉक्टर जसप्रीत व पूजा अग्रवाल की जमानत याचिका खारिज कर दी।

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