हरियाणा औषधि प्रशान सब-स्टैंटर्ड मामले गहरी नींद में

अंबाला

जब तक हरियाणा के राज्य औषधि नियंत्रक डा. राम मोहन शर्मा रहे तो राज्य के दवा व्यवसाइयों को निम्न स्तर की दवाओं की सूची एवं सरकारी आदेशों, अधिसूचनाओं की जानकारी समय-समय पर मिलती रहती थी, परन्तु डॉ० शर्मा की सेवानिवृत्ति के बाद से आज तक राज्य औषधि प्रशासन द्वारा निम्न स्तर की दवाओं, सरकारी आदेशों, अधिसूचनाओं की जानकारी दवा विक्रेताओं तक न पहुंचाना और औचक निरीक्षणों के दौरान उन्हीें के दम पर दवा विक्रेताओं पर सरकारी डंडा चलाना आम बात हो गई है। दवा व्यवसाई भी अनभिज्ञता के चलते गोरखधंधे का अभिन्न अंग बनकर कार्य करते रहते हैं। ऐसा भी नहीं कि दवाओं के सैंपल फेल न आएं हों और सरकारी आदेश अधिसूचना जारी न होगी हो। लंबे समय से राज्य दवा संगठन भी विवादों के घेरे में था। अब पटरी पर तो आ गया है, परंतु गैप के कारण अभी तक पुरानी तेज तरार कार्यप्रणाली पर नहीं पहुंच पाया जिसके कारण भी दवा व्यवसाई असमंजस की स्थिति से गुजर रहे हैं।