नशीली दवा का नया विकल्प बना व्हाइटनर और थिनर

किशोर व युवा आ रहे नशे की जद में, सूबे में बढ़ा आपराधिक ग्राफ, नशा जिम्मेवार
पटना (बिहार): राज्य में शराबबंदी के बाद लोगों ने नशा करने के नए-नए तरीके ईजाद कर लिए हैं। अब व्हाइटनर, सनफिक्स, गोमफिक्स, फोर्टबीन सूई आदि नशे का विकल्प बन रहे हैं। नशे के आदी लोग रूमाल या छोटे कपड़े में थीनर, व्हाइटनर को डालकर इस्तेमाल में लाते हैं। इन नशीले पदार्थों को शराब से ज्यादा नुकसानदायक माना गया है। इस तरह के नशे की लत में ज्यादातर किशोर और युवा आ रहे हैं। सूबे में आपराधिक मामलों का ग्राफ भी बढ़ गया है। इसके पीछे नशा ही मुख्य कारण माना जा रहा है।

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विनय कुमार तिवारी का कहना है कि डेंडराइट और व्हाइटनर का ज्यादा सेवन सीधे दिमाग पर अटैक करता है। इससे दिमाग की नसें सूखने लगती हैं और सोचने की क्षमता कम होती जाती है। वहीं, फोर्टबीन इंजेक्शन और कोर्डिनयुक्त कफ सिरप के लगातार इस्तेमाल से कंफ्यूज होना, याद्दाश्त का कमजोर होना, लीवर में गड़बड़ और पेट व सीने में दर्द जैसी समस्या पैदा होती है। वहीं, फेविकल, सुलेशन, लिक्विड, इरेजर और व्हाइटनर सूंघने की लत से निराशा और एनेमिया का खतरा बढ़ जाता है। इसके इस्तेमाल से पौरूष क्षमता भी प्रभावित होती है। इसके अलावा, गांजा भांग अधिक मात्रा में लेने से सांस लेने में दिक्कत आती है। मानसिक संतुलन बिगडऩे लगता है।