खांसी-जुकाम या पेन किलर लेने से पहले हो जाएं अलर्ट, फिर न कहना कि बताया नहीं

नई दिल्ली। खांसी-जुकाम या पेन किलर लेने वालों के लिए खास खबर है। भारत की केंद्रीय दवा नियामक संस्था (सीडीएससीओ) ने कंपनियों से सर्दी-खांसी और जुकाम की दो दवाओं और एक दर्द निवारक दवा का टेस्ट करने के निर्देश जारी किए हैं। इन दवाओं की सुरक्षा और प्रभावशीलता की समीक्षा करने के लिए टेस्टिंग की जाएगी।

फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन की हैं तीनों दवाएं

बता दें कि ये तीनों दवाएं 30 से अधिक सालों से फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) के रूप में उपलब्ध हैं। एफडीसी उन दवाओं को कहा जाता है, जो दो या अधिक दवाओं को मिलाकर एक दवा बनाई जाती है। इन दवाओं में खांसी और सर्दी की दवाओं में से एक में पेरासिटामोल (एंटीपाइरेटिक), फेनिलेफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड (नेजल डीकॉन्जेस्टेंट) और कैफीन एनहाइड्रस युक्त दवाएं शामिल हैं। दूसरे में विभिन्न संरचनाओं में कैफीन निर्जल, पेरासिटामोल, हाइड्रोक्लोराइड (नमक) और क्लोरफेनिरामाइन मालेट (एलर्जी-रोधी दवा) है।

दवा से सुरक्षा और प्रभाव की होगी जांच

सीडीएससीओ ने एक और दर्द निवारक दवा की जांच करने की सलाह दी है। ये दवा कई सालों से इस्तेमाल हो रही है। इसमें तीन तत्व हैं। पैरासिटामोल (बुखार कम करने वाली दवा), प्रोपाइफेनाज़ोन (दर्द कम करने और बुखार कम करने वाली दवा), और कैफीन। सीडीएससीओ ने फार्मा कंपनियों से इस दवा के इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा और प्रभाव के बारे में और जानकारी जुटाने को कहा है।

करीब 30 साल पुरानी दवाओं को जांचने के लिए कहा

इस कवायद के लिए ज्यादा संख्या में लोगों पर दवा टेस्ट करके देखी जाएगी। सीडीएससीओ का आदेश 1988 से पहले के कुछ एफडीसी की जांच करने के लिए 2021 में गठित एक विशेषज्ञ समिति के सुझावों पर आधारित है, जिन्हें लाइसेंसिंग प्राधिकरण से उचित अप्रूवल के बिना बिक्री के लिए मैन्यूफैक्चरिंग के लिए नई मंजूरी दी गई थी।

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