एफआई हॉस्पिटल को गिराने के केस में हाईकोर्ट के नए आदेश

लखनऊ। एफआई हॉस्पिटल को गिराने के केस में हाईकोर्ट ने नए आदेश जारी किए हैं। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एफआई हॉस्पिटल को गिराने के खिलाफ दाखिल रिट वापस ले ली गई। याची ने इसके साथ ही यूपी अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने के लिए नई याचिका दाखिल करने की छूट भी मांगी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले में दो दिनों तक यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं।

एक्ट के कुछ प्रवाधानों को चुनौती दी गई

यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन की एकल पीठ ने फरजाना सिराज की ओर से दाखिल रिट पर दिए हैं। सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता ने संशोधन प्रार्थना पत्र व राज्य सरकार को पक्षकार बनाए जाने के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया। पत्र में कहा गया कि उक्त संशोधन प्रार्थना पत्र के जरिए यूपी अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट के कुछ प्रवाधानों को चुनौती दी गई है।

नई याचिका दाखिल करने की छूट मांगी

उक्त प्रावधान संविधान के अध्याय 9 ए तथा 12वीं अनुसूची के विरुद्ध हैं। इसका एलडीए ने विरोध किया। याची ने यह अनुरोध भी किया कि उसे नई याचिका दाखिल करने की छूट के साथ वर्तमान याचिका को वापस लिए जाने की अनुमति दी जाए। इसे स्वीकार करते हुए न्यायालय ने कहा कि प्रतिवादियों का भी यह दावा नहीं है कि उक्त बिल्डिंग अब इस्तेमाल किए जाने की स्थिति में नहीं रह गई है।

याची ने तीन तरह के जवाब दाखिल किए थे

एफआई हॉस्पिटल

गौरतलब है कि पहले एलडीए ने अदालत को बताया था कि ध्वस्तीकरण के खिलाफ दाखिल अपील में याची की ओर से तीन तरह के जवाब दाखिल किए गए। पहले में उसने कहा कि प्रश्नगत बिल्डिंग का 25 साल पुराना स्वीकृत मानचित्र है, लेकिन वह मिल नहीं पा रहा है। दूसरे में कहा गया कि स्वीकृत मानचित्र 30 साल पहले का है जो मिल नहीं रहा है। वहीं, तीसरे उत्तर में कहा गया कि बिल्डिंग वास्तव में 100 साल पुरानी है। लिहाजा स्वीकृत मानचित्र की जरूरत नहीं है।

 

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