टीबी हॉस्पिटल के 45 कर्मचारियों को एक साथ किया सस्पेंड

मोहल्ला क्लीनिक

गोरखपुर। टीबी हॉस्पिटल के आउटसोर्सिंग पर लगे सभी 45 कर्मचारियों को एक साथ बर्खास्त कर देने का समाचार प्रकाश में आया है। बताया गया है कि यह कार्रवाई इन कर्मचारियों को बायोमेट्रिक हाजिरी के नाम पर वेतन कटौती का विरोध करने के फलस्वरूप की गई है।

यह है मामला

गोरखपुर एयरपोर्ट के पास बने टीबी अस्पताल में सेवा प्रदाता फर्म के तहत 45 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। बायोमेट्रिक हाजिरी न लगाने पर फर्म द्वारा इन कर्मचारियों का वेतन काट लिया गया। कर्मचारियों ने वेतन कटौती का विरोध किया। इसके चलते सेवा प्रदाता फर्म ने एक साथ सभी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है।

स्वास्थ्य विभाग से अनुबंध भी किया खत्म

फर्म ने कर्मचारियों को हटाने के साथ ही स्वास्थ्य विभाग के साथ अपना अनुबंध भी एकतरफा खत्म कर दिया है। हालांकि, अस्पताल के सीएमएस ने आश्वासन दिया है कि किसी कर्मचारी को बाहर नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा है कि फर्म का यह फैसला स्वीकार्य नहीं है।

सेवा प्रदाता फर्म ने ईमेल कर कर्मचारियों को बर्खास्तगी की सूचना दी। फर्म के इस कदम से कर्मचारियों में हडक़ंप मचा हुआ है। बता दें कि एयरपोर्ट स्थित 100 बेड के टीबी सह सामान्य अस्पताल में आउटसोर्सिंग पर 45 कर्मचारी तैनात हैं। इनमें से ज्यादातर नर्स और वार्ड ब्वॉय हैं। ये कर्मचारी फरवरी वर्ष 2016 से आउटसोर्सिंग पर तैनात किए गए। जुलाई 2021 से उनकी सेवा प्रदाता फर्म बदलकर दिल्ली की चींटी इंटरप्राइजेज कर दी गई थी।

छह माह पहले बायोमेट्रिक हाजिरी शुरू की

नई फर्म ने छह महीने पहले से बायोमेट्रिक हाजिरी लगावानी शुरू कर दी थी। इसके लिए अस्पताल के अंदर एक बायोमेट्रिक मशीन लगी है। इसमें सिर्फ आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की ही बायोमेट्रिक हाजिरी ली जा रही हैं। बायोमेट्रिक हाजिरी के शुरू होने से अब तक कर्मचारियों का मानदेय नहीं मिल पाया था। आठ फरवरी को खाते में चार महीने का मानदेय आया। उसमें भी बायोमेट्रिक हाजिरी के नाम पर कटौती हो गई। कर्मचारियों को चार हजार से लेकर 30 हजार रुपये तक कम मानदेय मिला है। फर्म ने इस कटौती की वजह बायोमेट्रिक हाजिरी का रिकॉर्ड माना है।

सीएमएस ने फर्म के फैसले को अस्वीकारा

उधर, टीबी अस्पताल के सीएमएस डॉ.एके वर्मा इन कर्मचारियों के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में चिकित्सकों के बाद यही कर्मचारी हैं। इन्हीं के भरोसे अस्पताल में मरीज भर्ती हैं। वे फर्म के फैसले को स्वीकार नहीं करते। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि किसी भी कर्मचारी को बाहर नहीं होने दिया जाएगा।

Advertisement