बच्चों की दवा जांच में निकली अमानक, फार्मा के एमडी को 1 साल कैद, मिली जमानत

इंदौर। बच्चों की दवा जांच में अमानक मिलने पर फार्मा मालिक को कोर्ट ने एक साल की सजा सुनाई है। इंदौर की दवा कंपनी क्वेस्ट लेबोरेटरीज प्रा.लि. के एमडी अनिल सबरवाल को जामतारा झारखंड की कोर्ट ने दोषी पाया। फलस्वरूप कंपनी मालिक केा एक साल की कैद के आदेश दिए गए हैं। साथ ही ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के प्रविधानों के अनुसार 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

यह है मामला

नौ साल पहले जामतारा जिला के ड्रग इंस्पेक्टर नसीम असलम ने इंदौर की कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। कंपनी द्वारा निर्मित बच्चों की बुखार की दवा पेरासिटामोल ओरल सस्पेंशन जांच में अमानक पाई गई थी। इस दवा को जामतारा के सदर अस्पताल में सप्लाई किया गया था। वहीं से जांच के लिए इसके सैंपल लिए गए थे। इसकी जांच सरकारी ड्रग टेस्टिंग लेबोरेटरी में हुई थी।

अस्पताल ने स्वास्थ्य विभाग को बताया था कि स्थानीय डीलर के जरिए यह दवा सप्लाई हुई थी। झारखंड के अधिकारियों ने इंदौर की दवा कंपनी से दवा से जुड़े दस्तावेज, टेस्ट रिपोर्ट आदि मांगे थे, लेकिन कंपनी ने उपलब्ध नहीं करवाए।

कोर्ट में 2016 में दर्ज हुआ था केस
इसके बाद जामतारा सत्र न्यायालय में साल 2016 में केस दर्ज हुआ था। मामले में नौ साल तक सुनवाई चली। इस बीच कंपनी के एमडी की ओर से सत्र न्यायालय के निर्णय के खिलाफ रांची हाई कोर्ट में अपील कर दी गई। इस आधार पर कंपनी के एमडी को जमानत भी मिल गई है।

फार्मा उद्योग में खलबली

इंदौर के फार्मा उद्योग में खलबली मची है। दरअसल, इंदौर व आसपास की दवा कंपनियां बीते दिनों से जांच एजेंसियों के निशाने पर है। अफ्रीकी देश कैमरून में बीते साल खांसी की दवा से बच्चों की मौत के बाद भी इंदौर की कंपनियों का नाम सामने आया था। तब दवा निर्माताओं के यहां से दवा और कच्चे माल के सैंपल लिए गए थे।

इस बीच एक दवा कंपनी रिमल लैब को विश्व स्वास्थ्य की गाइडलाइन का पालन नहीं करने के मामले में सील कर बंद करवा दिया गया था। बीते दिनों इंदौर पहुंचे भारत के ड्रग कंट्रोलर राजीव सिंह रघुवंशी ने भी कहा था कि मानकों के पालन के लिए सख्ती बरती जाएगी और अमानक दवा बनाने वालों पर कार्रवाई चलती रहेगी।

हाईकोर्ट रांची से मिली जमानत

उधर, क्वेस्ट लैबोरेटरीज के एमडी अनिल सबरवाल का कहना है कि हमने जामतारा की कोर्ट के निर्णय व सजा के खिलाफ हाई कोर्ट रांची में अपील की है। सजा पर रोक लगाकर मुझे जमानत दे दी गई है। हमारा वकील सुनवाई में पहुंच नहीं सका था। इसलिए यह सब हुआ है।

 

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