बैन दवा के उत्पादन का सच उजागर

भोपाल: करीब दो साल पहले मंत्रालय द्वारा प्रतिबंधित की गई दवा के निर्माण का मामला सामने आया है। दवा को पीथमपुर (इंदौर) स्थित फैक्टरी में तैयार किया जा रहा था। बाजार में उसे बेचने के लिए दवा की स्ट्रिप पर पुरानी तारीख डाली जा रही थी। औषधि विभाग को जब इस गोरखधंधे की सूचना मिली तो अधिकारियों की एक टीम का गठन कर फैक्टरी पर छापा मारा गया। कार्रवाई में फैक्टरी से भारी मात्रा में दवाएं बरामद की गई।

सोक्रस फार्मा कंपनी की इस दवा को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अनुशंसा पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2015 में प्रतिबंध लगाया था। हैरानी की बात ये कि दवा पर 2015 की तारीख से पैकिंग कर बिक्री के लिए दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा था। डायक्लोफेनिक मल्टीपल डोज (30 मिलीलीटर) नामक जिस इंजेक्शन का निर्माण किया जा रहा था इसका इस्तेमाल दर्द निवारक के रूप में किया जाता रहा है। मंत्रालय ने कंपनियों को दवा के सिंगल डोज बेचने की ही अनुमति दी थी। बताया जाता है कि इस दवा का उपयोग पशु चिकित्सा के लिए किया जा रहा था। छापामार टीम में औषधि निरीक्षक धर्मेश बिगौनिया, अशोक गोयल, शोभित कोष्ठा, राजेश बिंदल और योगेश गुप्ता मुख्य रूप से मौजूद रहे।

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