‘यूनिक’ होंगे देश के डॉक्टर

नई दिल्ली: आधार की तर्ज पर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने देश के सभी मेडिकल प्रैक्टिशनर को यूनिक परमानेंट रजिस्ट्रेशन नंबर देकर सिंगल डिजिटल सिस्टम के तहत लाने का फैसला लिया है ताकि देश भर के डॉक्टरों का ब्योरा एक ही जगह उपलब्ध हो सके। चिकित्सा जगत में एमसीआई के इस कदम का स्वागत किया जा रहा है। खासतौर पर महाराष्ट्र के उन डॉक्टरों में खुशी है जिन्हें हर 5 साल बाद अपना रजिस्ट्रेशन रिन्यु कराना पड़ता था। एमसीआई के मुताबिक, डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन, फर्जी अस्पतालों पर रोक लगाने और मेडिकल प्रैक्टिस का नियमन करने के लिए इस निर्णय पर मुहर लगी है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारी रमेश रोहिवाल की मानें तो यूनिफॉर्म रजिस्ट्रेशन नंबर सिस्टम से उन डॉक्टरों को मदद मिलती है, जो स्थान बदल लेते हैं। इससे पहले डॉक्टरों को दूसरे राज्य में जाने पर मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। वजह ये कि डॉक्टर दूसरे राज्य की मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड होते थे। यूनिक परमानेंट रजिस्ट्रेशन नंबर से डॉक्टरों को सुविधा रहेगी। साथ ही डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन की जानकारी हासिल करना भी आसान होगा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के नियम के तहत डॉक्टरों को रजिस्ट्रेशन रिन्यु कराने से पहले एक साल और दो साल का बॉन्ड पूरा करना होता था। यह सुविधा उन डॉक्टरों के लिए है जिन्होंने ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन और सुपर स्पेशियलिटी डिग्री 1980 से 2000 के बीच सरकारी मेडिकल कॉलेज से पूरी की है।