व्हील चेयर पर आई पीजीआई की स्वास्थ्य सेवा, हड़ताल जारी

रोहतक: बच्चा चोरी केस ने अब पीजीआई की चिकित्सा व्यवस्था को हिला दिया है। रेजीडेंट डॉक्टर पुलिस जांच से बचने के चक्कर में तीन दिन से हड़ताल पर बैठे है। यह हाल तब है जब राज्य सरकार ने हेल्थ सेक्टर में एस्मा कानून और पीजीआई में धारा 144 लगा रखी है। इलाज में लापरवाही बरतने पर मरीज और उनके तीमारदारों के विरोध पर उन्हें कानून का पाठ पढ़ाने वाले पढ़े-लिखे डॉक्टर खुद की बारी आई तो कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। रोगी का इलाज करने के अपने मूल धर्म को भी कलंकित कर रहे हैं।

उधर, कुलपति ओपी कालरा और पुलिस अधीक्षक पंकज नैन ने साफ कह दिया है कि डॉक्टरों को जांच में शामिल होने के लिए थाने में आना ही होगा। एक बार नहीं चाहे 10 बार बुलाएं, डॉक्टर मना नहीं कर सकते। अंदर खाने सीनियर डॉक्टर भी इस मामले को लेकर कई धड़ों में बंटे दिखाई दे रहे हैं। कुलमिलाकर, डॉक्टर-प्रबंधन और सरकार की इस आपसी खींचतान में मरीज की जान आफत में आ गई है। वीसी कालरा भी मानते हैं कि हड़ताल से स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो रही है। जिन मरीजों के ऑपरेशन की तारीख थी, उन्हें आगे बढ़ा दिया गया है।

पीजीआई प्रदेश का सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान है। यहां हरियाणा ही नहीं दूसरे राज्यों से भी मरीज इलाज के लिए आते हैं। लेकिन लगातार तीन दिन से रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज मारे-मारे फिर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो मौके का नाजायज फायदा उठाकर सेटिंग के चलते कुछ डॉक्टर और कर्मचारी मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों का रास्ता दिखा रहे हैं। हालांकि हड़ताल से भी इस तरह की बाते मीडिया की सुर्खियां बन चुकी है।

मेडिकल प्रशासन ने सीनियर डॉक्टरों और विशेषज्ञों की स्पेशल ड्यूटी लगाई है। सिविल अस्पताल के डॉक्टरों से भी सहयोग लिया जा रहा है। बावजूद इसके भर्ती मरीजों की संख्या इतनी ज्यादा है कि संभालना मुश्किल हो रहा है। रेजीडेंट डॉक्टरों का आरोप है कि पुलिस जांच के नाम पर उनसे बदतमीजी कर रही है। पुलिस को डॉक्टरों से पूछताछ करनी है तो वह पीजीआई परिसर में आए, डॉक्टर जांच के लिए थाने के चक्कर नहीं काटेंगे। हालत यह हो गई कि स्थानीय तथा आसपास के मरीजों ने पीजीआई इलाज के लिए आना बंद कर दिया है। दूर-दराज वाले दाखिल मरीज भी निराश होकर लौटने की सोच रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, पिछले तीन दिनों में डॉक्टरों की हड़ताल के चलते आपातकाल विभाग में तीन मरीज और वार्डों में भर्ती छह मरीजों की मौत हो चुकी है। यह अलग बात है कि इसका जवाब न तो पीजीआई प्रशासन के पास है न सरकार के पास। उधर, पुलिस ने गायब बच्चा ढूंढने के लिए कई टीमों का गठन किया। जिसका नतीजा यह निकला कि दिल्ली से एक बच्चा बरामद किया है। पुलिस को शक है कि पीजीआई से चोरी हुआ बच्चा ये हो सकता है। शायद इसी कारण बच्चे का उसके माता-पिता से डीएनए टेस्ट मैच करवाने की तैयारी हो रही है।