भारत के 6 करोड़ लोग क्यों हैं मनोरोगी, पता चला

नई दिल्ली: विश्व मानसिक स्वास्थ्य सम्मेलन की आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. सुनील मित्तल ने जब कहा कि भारत में 6 करोड़ लोग मनोरोग और अवसाद से ग्रस्त हैं तो वहां मौजूद चिकित्सकों के चेहरों पर चिंता छा गई। डॉ. मित्तल सीआईएमबीएस इंडिया के निदेशक और इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट साइकेट्री के सह संस्थापक और पूर्व अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि पहली चुनौती यह जानना है कि आप निराश हैं, और हैं तो क्यों? लोग चुप रहकर, पछतावे के सहारे सब कुछ झेलते रहते हैं। उन्हें यह अहसास नहीं होता कि वे अवसाद से पीडि़त हैं।

सम्मेलन के 21वें संस्करण में चौथे और अंतिम दिन आए डॉ. सुनील मित्तल के साथ बॉलिवुड अभिनेत्री इलियाना डीक्रूज ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी संघर्ष की कहानी बयां की। मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए डीकू्रज को महिला सब्स्टेंस पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सम्मेलन का आयोजन वल्र्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ (डब्ल्यूएफएमएच), राष्ट्रीय स्वास्थ्य संघों, गैर-सरकारी संगठनों, नीति विशेषज्ञों और अन्य संस्थानों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। पहली बार सार्क क्षेत्र में इस तरह का कार्यक्रम हो रहा है।

अनुभव बांटते हुए इलियाना ने कहा कि मैं हमेशा से आत्मचेतन रही हूं। हर समय खुद को कमजोर और दुखी महसूस करती थी। मुझे इसका पता तब तक नहीं चला जब तक मुझे मदद नहीं मिली। यह जानने में कि मैं अवसाद और शारीरिक डिसमॉर्फिक बीमारी से पीडि़त हूं। मैं जो करना चाहती थी, वह सभी को स्वीकार करना था। एक समय पर मैंने आत्महत्या तक का विचार बनाया और चीजों को समाप्त करना चाहा। हालांकि बाद में सब बदला और मैंने खुद को स्वीकार किया। नोबल विजेता कैलाश सत्यार्थी और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की सम्मेलन में विशेष उपस्थिति रही।