दवा उद्योगों में खलबली, देशभर में जांच शुरू

सोलन: सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) द्वारा अक्टूबर के ड्रग अलर्ट में जो खुलासा हुआ है, उसने दवा सेक्टर की नींद उड़ा दी है। दरअसल, केंद्र के सीडीएससीओ संगठन ने देशभर के 31 दवा उद्योगों में निर्मित दवाओं को मानकों के अनुरूप खरा नहीं पाया। इनमें हार्ट अटैक, ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने और खून की कमी दूर करने वाली दवाएं खासतौर पर शामिल हैं। सभी सब स्टैंडर्ड दवाओं को बाजार से हटाकर नष्ट करने के आदेश दिए गए हैं। एशिया का फार्मा हब कहलाने वाले हिमाचल प्रदेश के दवा उद्योगों से निकली आठ दवा सैंपल में फेल पाई गई। सभी राज्यों के औषधि नियंत्रकों को संबंधित दवा उद्योगों पर कारवाई के आदेश जारी किए गए हैं। हिमाचल प्रदेश राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाह ने कहा कि प्रदेश के सभी संबंधित दवा उद्योगों को नोटिस जारी किए गए हैं। सभी दवा उद्योगों से जवाब मांगा गया है। साथ ही खराब पाए गए दवा के सारे बैच को वापस मंगवाने के आदेश दिए हैं। मारवाह ने बताया कि वह समय समय पर टीम बनाकर दवा उद्योगों में दबिश देते हैं और खामियां पाए जाने वाले उद्योगों के लाइसेंस रद किए जाते हैं।

जानकारी के मुताबिक, दवा औद्योगिक क्षेत्र बद्दी के इनालाप्रिल मैलीट टेबलेट दवा जोकि गुल्लरवाला स्थित ऐफी प्रिंटल उद्योग में निर्मित है, वह फेल पाई गई। यह दवा हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक रोकने के लिए उपयोगी है। दूसरी दवा भी इसी उद्योग की खराब पाई गई। स्कॉट ऐडिल फार्मेसिया झाड़माजरी स्थित उद्योग में निर्मित ट्रीयामसिनोलोन ऐसिटोनाइड इंजेक्शन में भी खामियां मिली। यह दवा सांस की समस्या और रक्त से जुड़ी बीमारियों में इस्तेमाल होती है। यूरिनरी और बैक्टिरियल इंफेक्शन ठीक करने वाली दवा सीफोप्राजोन एंड सल्बेक्टम इंजेक्शन में कुछ कण और उसकी शुद्धता में खामियां मिली हैं। यह दवा बद्दी के थाणा क्षेत्र स्थित यूनीमार्क रेमिडीज उद्योग से बनी है। ऑर्य हेल्थकेयर झाड़माजरी में निर्मित स्टिरल वाटर इंजेक्शन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं।

कांगड़ा के संसारपुर टैरेस स्थित उद्योग मैडिरोज ड्रग्स में निर्मित डिक्लोफिनैक पोटासियम, पैरासीटामोल टैबलेट दवा भी डिसइंटीग्रेशन में सब स्टैंडर्ड पाई गई है। खून की कमी में इस्तेमाल होने वाली दवा आयरन, फोलिक ऐसिड टैबलेट जोकि परवाणू जिला सोलन स्थित लीगन हेल्थकेयर उद्योग से निर्मित है, उसे भी सब स्टैंडर्ड घोषित किया गया है। सोलन के नालागढ़ स्थित थियोन फार्मास्यूटिकल उद्योग में निर्मित सिफिक्सिम एंड लेक्टिक ऐसिड टेबलेट को भी गुणवत्ता मानकों पर खराब पाया गया है। सिरमौर के पांवटा साहित स्थित जी लैबोरेट्रीज उद्योग में निर्मित क्लोरहैक्सिडन माउथवाश को भी मानकों पर खराब पाया गया है।