जेनेरिक दवाओं का असली चेहरा

नई दिल्ली। जेनेरिक दवाओं के बारे में हमेशा से एक बात कही जाती है कि वो सबसे सस्ती होगी है। इतनी की बड़ी-बड़ी बीमारियों की दवाएं जिनकी कीमत लाखों में होती है। उसके मुकाबले जेनेरिक दवाओं की कीमत हजारों में होती है। आज मेडीकेयर न्यूज आपको जेनेरिक दवाओं के बारे में वो जानकारी देगा। जिसके बारे में आपको जरूर पता होना चाहिए।

क्या हैं जेनेरिक दवाएं?

किसी बीमारी का इलाज करने के  लिए एक सॉल्ट को तैयार किया जाता है। जिसका जेनेरिक नाम रखा जाता है। खास बात ये है कि किसी भी साल्ट का जेनेरिक नाम पूरी दुनिया में एक ही रहता है।

क्यों जेनेरिक दवाएं सस्ती होती है?

जेनेरिक दवाओं और महँगी दवाओं की कीमतों में कम से कम पांच से दस गुना का अंतर होता है और कई बार ब्रांडेड दवाओं और जेनेरिक दवाओं की कीमतों में 90% तक फर्क पाया जाता है। जेनेरिक दवाओं की कीमतों के निर्धारण में सरकारी हस्तक्षेप होता है जिसके चलते कीमतें कम रखी जाती हैं जबकि पेटेंट ब्रांडेड दवाओं की कीमतों का निर्धारण कम्पनियाँ खुद करती हैं और मनमानी कीमतें तय करके बाजार में दवाएं पंहुचा दी जाती हैं।

जेनेरिक दवाओं के लेकर भ्रम

लोगों के मन में भ्रम रहता है कि जेनेरिक दवाएं सस्ती है, इसलिए वो ज्यादा कारगार नहीं है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। बाकी दवाईयों की तरह ही जेनेरिक दवा तैयार की जाती है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, अगर डॉक्टर द्वारा जेनेरिक दवाएं लिखी जाएँ तो विकसित देशों में स्वास्थ्य खर्च 70% और विकासशील देशों में और भी कम हो सकता है।