ई-सिगरेट पर नड्डा से राज्यसभा में सवाल, ड्रग विभाग चुप

नई दिल्ली: ई-सिगरेट को पूरी तरह से बैन किया जाए या आम सिगरेट की तरह इसकी बिक्री और इस्तेमाल को रेग्युलेट किया जाए, ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब केंद्र सरकार नहीं ढूंढ़ पा रही है। हालांकि सरकार की ओर से बनाई गई तीनों कमेटियों ने चार माह पहले ई-सिगरेट को बैन करने की सिफारिश की है, फिर भी मामला प्रभावहीन नजर आ रहा है। बीते कल राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्वीकार किया कि स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर कोई एडवाइजरी राज्यों को जारी नहीं की गई है।

अपनी सफाई में नड्डा ने कहा कि ई-सिगरेटों के बारे में तीन कमेटियों की रिपोर्ट सरकार को मिल गई है। इसी आधार पर सरकार तय करेगी कि क्या एक्शन लिया जाए जबकि सरकार द्वारा गठित कमेटियों ने इस साल अगस्त में मामले पर अपनी रिपोर्ट दी थी। फिर सितंबर के पहले हफ्ते में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की बैठक हुई। इसमें सैद्धांतिक तौर पर ई-सिगरेट को बैन करने का फैसला लिया गया था। बैठक हुए चार माह बीत गए लेकिन ई-सिगरेट की फाइल वहीं की वहीं अटकी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि अभी यह तय नहीं हो पाया है कि इसे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट और सिगरेट एंड अदर टोबैको प्रोडक्ट एक्ट के तहत रोक लगाएं या फिर प्वाइजन एक्ट के तहत बैन किया जाए।

दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्वास्थ्य निदेशक डॉ. एसके अरोड़ा ने कहा कि ई-सिगरेट को लेकर कंपनियां ये प्रचार करती हैं कि इससे आम सिगरेट पीने की लत छूट सकती है जबकि असल में ऐसा होता नहीं है। झूठे प्रचार के झांसे में लोगों को आम सिगरेट के अलावा ई-सिगरेट की भी लत लग जाती है।