फार्मासिस्ट क्या करें, डॉक्टर है असली दोषी

नई दिल्ली: इलाज के दौरान मरीज को समय न देने और बुरा व्यवहार बरतने के मामले में राजस्थान, बिहार, हरियाणा और गुजरात के सरकारी डॉक्टर और अस्पतालों का रिकॉर्ड सबसे खराब है। बिहार में सबसे ज्यादा 53 फीसदी मरीज सरकारी डॉक्टरों के व्यवहार से नाखुश हैं। हरियाणा और राजस्थान के 47 फीसदी मरीजों ने डॉक्टर के व्यवहार से नाखुशी जताई। गुजरात के 43 फीसदी मरीजों ने डॉक्टर के व्यवहार पर नाराजगी जताई है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के ‘मेरा अस्पताल’ फीडबैक सिस्टम की 14 महीने की रिपोर्ट से यह तथ्य सामने आए। देश के सात बड़े राज्यों में करीब 50 फीसदी सरकारी डॉक्टर मरीजों से बहुत रूखा व्यवहार करते हैं। दिल्ली में 36 फीसदी मरीज अस्पताल कर्मियों के व्यवहार से नाखुश हैं। फीडबैक सिस्टम का मकसद सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों की संतुष्टी और अस्पताल की जिम्मेदारी तय करना है। इसमें पांच श्रेणियों में मरीजों से फीडबैक लिया गया था। हालांकि ये सिस्टम हर राज्य में पूरी तरह से खड़ा नहीं हो पाया है।

उधर, दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी मरीज अच्छे-खासे परेशान है। सरकारी अस्पतालों में वो सब दवाएं नहीं मिलती, जो वहां के डॉक्टर लिखते हैं। फार्मासिस्ट से दवा मांगते हैं तो वह बाहर कैमिस्ट शॉप की तरफ इशारा करते है। मरीज फार्मासिस्टों की इस बेबसी को समझते हैं, क्योंकि अस्पताल में दवा ही नहीं होगी तो फार्मासिस्ट क्या करे। स्वास्थ्य सुधार पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक, डॉक्टर, अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत इस सबकेलिए जिम्मेदार है।