हिमाचल की फार्मा कंपनियों का जवाब नही!

नई दिल्ली: भारतीय दवा निर्माता संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य विनोद ने कहा कि इस साल भारत में दवा कंपनियों के रुटीन में 45000 सैंपल दवा विभाग ने लिए जिसमें से मात्र तीन फीसदी ही सही नहीं पाए गए। हिमाचल पूरे विश्व में उच्च किस्म की दवाईयां बनाने के लिए विख्यात है। लघु उद्योग भारती फार्मा विंग के प्रांतीय चेयरमैन सतीश सिंगला ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ड्रग प्राइस कंट्रोल एक्ट को सुनिश्चित बनाया जाए।

नियमों और कानूनों को ज्यादा सरल किया जाए क्योंकि फार्मा उद्योगों को 45 विभागों से एनओसी लेना पड़ता है। इसमें उद्योगपतियों की काफी समय बर्बाद हो जाती है। हिमाचल ड्रग मैन्युफेक्चर एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष एमबी गोयल ने कहा कि हिमाचल में सर्वाधिक गुणवत्तापरक दवाईयों का निर्माण होता है और यहां से पूरे भारत में 50 फीसदी से ज्यादा दवाईयों की आपूर्ति होती है। गोयल ने दावा किया कि कई बार प्रचारित किया जाता है कि हिमाचल में बनने वाली दवाईयां घटिया और सब स्टैंडर्ड हैं जबकि यह हकीकत से कोसों दूर है। हिमाचल में मौसम तेजी से बदलता रहता है और सिर्फ एमएसएमई उद्योग ही नहीं, बड़ी-बड़ी कंपनियों के सैंपल भी कई बार सब स्डैंडर्ड हो जाते हैं। इसका अर्थ यह नहीं होता कि यह दवाई जहर है या इसकी क्वालिटी घटिया है।