एक ही उच्चस्तरीय कमेटी करेगी दवा कंपनी-सरकार के बीच विवादों का निबटारा

नई दिल्लीः भारत सरकार ने नई दवाइयों या नए फार्मूले (सूत्रण) की स्वीकृति एवं उनकी कीमतें तय करने के मामले में सिफारिशें करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी सरकार एवं दवा कंपनियों के बीच उत्पन्न विवादों का निपटारा करेगी। नवंबर महीने में भारत सरकार के नैशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) ने 51 दवाइयों की कीमतें 6 से लेकर 53 प्रतिशत तक घटा दी थी। इन दवाइयों मे कैंसर, दर्द और दिल, गुर्दे एवं जिगर के रोगों के इलाज में काम आने वाली दवाइयां भी शामिल हैं ।

यह कदम इस साल के शुरू में नए घुटने के प्रत्यारोपण के इम्प्लांट व दिल के इलाज एंजियोप्लास्टी में काम आने वालवे स्टेंट जैसे मेडिकल उपकरणों की कीमतों पर अंकुशों लगाने के बाद उठाया गया। नई कमिटी पहले से गठित दो कमेटियों की जगह लेगी। इन दो पुरानी कमेटियों में एक नई दवाइयों का आकलन कर उनकी कीमतें तय करती हैं और दूसरी पैकेजिंग व नई खोज से जुड़े मुद्दों पर विचार करती हैं।

2013 में कीमतों पर नियंत्रण के दायरे को बढ़ाने के बाद हुए अनुभवों के आधार पर दोनों कार्यों को एक ही कमेटी के तहत समेटने का फैसला लिया गया है। रसायन व उर्वरक मंत्रालय के तहत डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स ने नियंत्रण का दायरा बढ़ाया था। नई कमेटी के दवाइय़ों के नएपन के फार्मास्यूटिकल उद्योग के दावों की पड़ताल के साथ साथ, इस बात की जांच के लिए अधिकृत होगी कि किसी दवा को 2013 दवा नियंत्रण के आदेश से छूट है या नहीं।

इस कमिटी में एनपीपीए के विशेषज्ञों के साथ साथ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय एवं इसके दवा नियंत्रण संभाग, केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन ( सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन, सीडीएससीओ) के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

नई दवाइयों एवं सूत्रण (फारम्यूलेशन) को लेकर आवेदन प्राप्त होने के बाद एनपीपीए के पास इनसे जुड़े मुद्दों को कमेटी के पास भेजने के लिए 4 सप्ताह होंगे । उसके बाद कमेटी को अपनी अनुशंसा 4 सप्ताह में ही देनी पड़ेगी। अनुशंसा प्राप्त होने के एनपीपीए को 4 सप्ताह के भीतर फैसला लेना होगा।