मुश्किलों में दवा कंपनी

बद्दी। पिछले एक साल में 110 दवाएं मानकों पर खरा उतरने में फेल हो चुकी है। हिमाचल में दवाएं बनाने वाले फार्मा उद्योग जो दवाएं बना रहे है वो लगातार फेल हो रही है। जिससे दवा उद्योग में बेचैनी का माहौल है।

साल 2017 में जनवरी से दिसंबर तक देशभर में भरे गए दवाओं के 373 सैंपलों में से 110 दवाएं खरे नहीं उतरे। खास बात ये देखने में सामने आई कि जो 110 दवाओं के सैंपल फेल हुए, उन दवाओं को हिमाचल के उद्योगों द्वारा निर्मित किया गया था। इसका साफ मतलब है कि हिमाचल में जारी दवा उद्योग अब गलत कारणों की वजह से रेडार पर है।

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा प्रतिमाह लिए जाने वाले सैंपलों में हिमाचल की दवाएं फेल हो रही हैं। दिसंबर के ताजातरीन ड्रग अलर्ट में देशभर के लिए 30 दवाओं के सैंपलों में 10 दवाएं हिमाचल के उद्योगों की फेल हुई हैं। हर माह आने वाली सीडीएससीओ की रिपोर्ट में हिमाचल के उद्योगों की दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं या फिर वह सब स्टैंडर्ड पाए जा रहे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, कैलसिटस-डी, लोपेमाईड, बिग टम और सटेराईल वॉटर, क्लेवोगार्ड ड्राई सिरप, पैराजीनामाईड, एसिलोफेनेक और पैरासिटामॉल, हैपरिन सोडियम इंजेक्शन, कैलेमाईन एलोयवेरा व पैराफिन लोशन और लैनसोपराजोल दवां का सैंपल फेल बताया गया है। अब देखने वाली बात होगी कि हिमाचल का दवा उद्योग इन नई परेशानियों से कैसे उबरता है।