ड्रग कंट्रोल पॉलिसी का बना मजाक

चंडीगढ़। 2 साल पहले चंडीगढ़ प्रशासन के हैल्थ डिपार्टमैंट की तरफ से दवाओं की क्वालिटी पर नजर रखने के लिए ड्रग कंट्रोल पॉलिसी का निर्धारण किया गया लेकिन अभी तक पॉलिसी का धरातल पर लागू नहीं किया गया है। शहर में ड्रग कंट्रोल पॉलिसी की धज्जियां उड़ रही हैं और इसपर कोई ध्यान देने वाला नहीं है।

पॉलिसी के तहत शहर के तीन जोन के ड्रग कंट्रोल ऑफिसर्स (ड्रग इंस्पैक्टर्स) के निरीक्षण क्षेत्रों का बदलाव हर छह महीने में करने का फैसला लिया गया था। हालांकि हकीकत में पिछले 7 महीनों से ऑफिसर्स पुराने जोन्स में काम कर रहे हैं जबकि जोन्स का बदलाव छह महीने पूरे होने से पहले ही कर दिया जाना चाहिए था।

सूत्रों की मानें तो ड्रग कंट्रोल ऑफिसर्स अपने जोन्स में बदलाव नहीं चाहते क्योंकि उनके जोन्स की कैमिस्ट शॉपस के साथ अच्छी खासी सैटिंग हो चुकी है और नए जोन में तबादले से ऑफिसर्स बचना चाहते हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी कि करीब दो साल पहले खुड्डा जस्सू की एक कैमिस्ट शॉप सैंट्रल गवर्नमैंट हॉस्पिटल सप्लाई की ऐसी दवाएं पी.जी.आई. पैशेंट्स को बेचते हुए पकड़ा गया था जो पैशेंट्स को मुफ्त में मिलनी चाहिए थी। कुछ ऐसी दवाओं की सेल भी दवा दुकानदार करते हैं जो डाक्टर की प्रिसक्रिपशन के बगैर पैशेंट्स को नहीं बेची जा सकती। इन ही चीजों को रोकने के लिए ड्रग कंट्रोल पॉलिसी बनाई गई थी लेकिन यहां तो सेटिंग कर सब काम धड़ले से किए जा रहे है।

ऐसी बहुत सी चीजों पर नजर रखने का काम ड्रग कंट्रोल ऑफिसर्स का ही होता है लेकिन इस सब के बीच किसी का नुकसान हो रहा है तो वो मरीज है जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं दिख रहा है।