रक्षा विभाग के बजाए बाजार पहुंची दवा

जयपुर। रक्षा विभाग (डिफेंस) को सप्लाई करने के बजाए लाखों की दवाइयां बाजार में पहुंचा देने का मामला सामने आया है। ये दवाइयां सप्लायर हरीश चंचलानी के मकान से जब्त की गई थीं। हैरान करने वाली बात यह है कि सप्लायर ने डिफेंस की इन दवाओं पर ‘नॉट फॉर सेल’ का मार्क हटाकर प्राइज टेग लगा दिया था। बहरहाल, अजमेर पुलिस ने आरोपी सप्लायर को गिरफ्तार कर लिया है।

गौरतलब है कि नवंबर, 2017 में पुलिस ने नकली दवाओं के सरगना हरीश चंचलानी के घर पर रेड की तो वहां 53 लाख की दवाएं बरामद हुईं। इन दवाइयों में सिप्ला कंपनी का यूरीमेक्स भी मिला। ड्रग विभाग के अधिकारी जब जब्त दवा के बैच नंबर की जानकारी जुटाने के लिए सिक्किम गए तो उन्हें बताया गया कि इस बैच की दवा डिफेंस को भेजी जा चुकी है। सिप्ला कंपनी ने इसकी लिखित जानकारी ड्रग विभाग को दी है। ड्रग कंट्रोलर डॉ. अजय फाटक का कहना है कि आरोपी हरीश चंचलानी के घर से दवाएं बरामद हुई थी। इनमें से एक बैच डिफेंस को भेजा जाना था। वह उस बैच का माल कहां से और कैसे ले आया, इसका अभी पता नहीं लग पाया है। अजमेर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है। आरोपी हरीश चंचलानी पर पहले भी कई मामले दर्ज हो चुके हैं। ड्रग विभाग ने अजमेर के क्लॉक टावर में इंजेक्शन फोर्टविन की अवैध खरीद-फरोख्त पकड़ी थी। इस खरीद और बिक्री के बिल नहीं थे और इसमें हरीश चंचलानी गिरफ्तार किया गया। लेकिन जमानत पर छूट गया था।

इसके बाद ड्रग विभाग ने हाईकोर्ट में रिट लगाई। उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद हरीश ने अग्रिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में रिट लगाई लेकिन पांच सुनवाई के बाद हरीश ने रिट विड्राल कर ली। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आर के अग्रवाल और अभय मनोहर सप्रे ने पांच फरवरी 2018 को आदेश दिया कि हरीश तुरंत प्रभाव से सरेंडर करे। इसके बाद छह फरवरी को उसे अजमेर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पिछले साल 10 नवंबर को घर पर छापे के बाद से ही हरीश जयपुर पुलिस की गिरफ्त से दूर था। जयपुर पुलिस का कहना था कि वे उसे ढूंढ़ रहे हैं। इस बीच, हरीश ने सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर डाली। गनीमत रही कि याचिका खारिज हो गई, अन्यथा वह पकड़ में ही नहीं आ पाता। हरीश का दवा लाइसेंस कैंसिल कर दिया गया है, साथ ही उसके परिवार में किसी को भी लाइसेंस नहीं देने के निर्देश भी जारी हुए हैं।