कैंसर को बुलाती है एंटी-एसिड दवा

नई दिल्ली। आम तौर पर लोग जब भी किसी पार्टी-फंक्शन में जाते हैं, तो वहां ऑइली या स्पाइसी फूड खा लेते हैं। ऐसे में वे एसिडिटी से बचने के लिए अक्सर ऐंटासिड खा लेते हैं। मेडिकल एक्सपट्र्स का मानना है कि यह आदत काफी खतरनाक है। एसिड पेट में प्राकृतिक रूप से बनता है और खाना पचाने में मदद करता है। इसको न्यूट्रलाइज करने या इसका प्रोडक्शन रोकने के लिए कभी-कभी दवा लेना तो ठीक है लेकिन इसे आदत नहीं बनाना चाहिए। क्योंकि एसिड बनने की प्रक्रिया को लंबे वक्त तक रोकने से डाइजेस्टिव सिस्टम प्रभावित होता है और इससे किडनी डैमेज और ऑस्टियोपोरोसिस तक हो सकता है। नई साइंस में गैस्ट्रिक कैंसर में प्रोटोन पंप इनहिबिटर्स (पीपीआई) के रोल को भी देखा जा रहा है।
इंस्टिट्यूट ऑफ लिवर ऐंड बाइलियरी साइंसेज के डायरेक्टर डॉ. एसके सरीन का कहना है कि खाना पचाने के लिए एसिड की जरूरत होती है और यह गैस्ट्रिक कैंसर के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया रोकने में मदद करता है। दुर्भाग्य से लोगों को इस बात का पता नहीं होता और वह बात-बात पर ऐंटी-एसिड दवा खा लेते हैं। लगातार पीपीआई लेने वाला पांच में एक व्यक्ति इसका आदी हो जाता है। वहीं, डॉक्टर राधिका का कहना है कि एंटी-एसिड दवाओं का गलत इस्तेमाल पेनकिलर्स से भी ज्यादा होता है। मैक्स हॉस्पिटल के एंडोक्राइनॉलजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. सुजीत झा के मुताबिक लंबे वक्त तक ऐंटी एसिड दवाओं के सेवन से किडनी खराब हो सकती है। एम्स में फार्माकॉलोजी के प्रोफेसर और हेड डॉ. वाईके गुप्ता का कहना है कि दवा खाने के बजाय लोगों को एसिड बनने की वजह का पता लगाना चाहिए। ज्यादा एसिड तब बनता है जब हम ऑइली और स्पाइसी खाना खाते हैं। फास्ट फूड का इसमें सबसे बड़ा हाथ है। फिजिकल ऐक्टिविटी की कमी से भी खाना न पचने की समस्या हो जाती है इसलिए डॉक्टर अक्सर फिजिकल ऐक्टिविटी की सलाह देते हैं। एसिड कंट्रोल में प्राणायाम काफी मददगार होता है। हरी-पत्तेदार सब्जियां और फल खाना भी काफी फायदेमंद रहता है।