मेडिकल डिवाइसेज का दायरा बढ़ेगा

नई दिल्ली। मेडिकल डिवाइसेज की कीमतों की अधिकतम सीमा तय नहीं होगी। इस फैसले पर भारत ने पुनर्विचार के लिए अमेरिकी दबाव को दरकिनार कर दिया है। भारत ने अमेरिका से दो टूक कहा है कि वह अभी उन मेडिकल डिवाइसेज का दायरा बढ़ाएगा, जिनकी कीमतें नियंत्रित की जाएंगी। दरअसल अमेरिका स्टेंट और नी ट्रांस्पलांट से जुड़े मेडिकल डिवाइसेज के प्राइस कंट्रोल का विरोध कर रहा है क्योंकि अमेरिकी कंपनियों का आरोप है कि इससे उनके बाजार पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
भारत दिल से जुड़ी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले 3 और मेडिकल डिवाइसेज को प्राइस कंट्रोल के दायरे में लाने की तैयारी में है। भारत का मेडिकल डिवाइस मार्केट 5 अरब डॉलर का है और इस वजह से यह ऐबॉट और बोस्टन साइंटिफिक कॉर्पोरेशन जैसी अमेरिकी कंपनियों को आकर्षित कर रहा है। भारत ने इस क्षेत्र में हद से ज्यादा मुनाफाखोरी पर लगाम लगाने के लिए प्राइस कंट्रोल की नीति अपनाई है, जिससे ये कंपनियां नाराज हैं।
पिछले साल सितंबर में यूनाइटेड स्टेड ट्रेड रेप्रजेंटेटिव्स (स्ञ्जक्र) ने पीएम नरेंद्र मोदी और ट्रेड मिनिस्टर सुरेश प्रभु को खत लिखकर गुजारिश की थी कि प्राइस कंट्रोल के दायरे में और अधिक मेडिकल डिवाइसेज को न लाया जाए। सूत्रों के मुताबिक पिछले महीने स्ञ्जक्र के असिस्टेंट ट्रेड रेप्रजेंटेटिव मार्क लिंसकॉट के साथ बैठक में भारतीय अधिकारियों ने कहा कि भारत ने फैसला किया है कि वह इस तरह की किसी भी तरह की प्रतिबद्धता नहीं जताएगा। इस मुद्दे पर भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं होगा।