ड्रग ट्रायल में 95 लोगों की मौत

जयपुर। बहुराष्ट्रीय कंपनियों की दवा का रोगियों पर प्रयोग (ड्रग ट्रायल) के दौरान प्रदेश में 95 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं, इन दवाओं के दुष्प्रभाव से 291 रोगियों की तबीयत बिगड़ गई। यह बात खुद राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पेश हलफनामे में स्वीकारी है। सरकार ने बताया कि ये तथ्य क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया व इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की वेबसाइट से मिली जानकारियों पर आधारित हैं। जनहित याचिका दायर करने वाले संगठन स्वास्थ्य अधिकार मंच के अमूल्य निधि ने बताया कि सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य सचिव सीके मैथ्यू के हस्ताक्षर से हलफनामा पेश किया था। इसमें बताया कि 2012 तक प्रदेश में 213 ड्रग ट्रायल 60 डॉक्टरों द्वारा किए। सरकार ने जिन 95 की मौत हुई, उनमें 4 मामलों को मुआवजे के योग्य माना है।
सरकार ने हलफनामे में स्वीकार किया कि उसे पूरी जानकारी नहीं है कि राज्य में कहां, कौन डॉक्टर किन रोगियों पर किस दवा कंपनी के लिए ट्रायल कर रहा है। सरकार ने कहा कि ड्रग कंट्रोलर जनरल द्वारा जारी ट्रायल की जानकारी उसे भी दी जाए। सरकार ने यह भी लिखा है कि दवा परीक्षण को मंजूरी देने का कार्य जो एथिक्स कमेटियां करती हैं, उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उधर, औषधि नियंत्रक अजय फाटक ने कहा कि पिछले तीन-चार सालों के दौरान राजस्थान में ड्रग ट्रायल संबंधित किसी मौत या अनैतिकता की जानकारी मुझे नहीं है।  गौरतलब है कि हाल ही में जयपुर के मालपाणी अस्पताल में चूरू के अशिक्षित ग्रामीणों पर धोखे से दवा परीक्षण का मामला सामने आने के बाद से प्रदेश देशभर में चर्चा में आया है। ऑस्टियो ऑर्थराइटिस के लिए होने वाले इस ट्रायल में 40 वर्ष से अधिक के रोगियों पर परीक्षण किया जाना था, लेकिन अस्पताल ने सेहतमंद युवाओं पर ही ट्रायल शुरू कर दिया था।