दवाइयों-उपकरणों के रेट होंगे फिक्स 

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों पर लगाम कसने के लिए प्रॉफिट कैपिंग पॉलिसी तय की है। इस पॉलिसी के तहत प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवाने पर मरीज से ओवरबिलिंग, दवाइयों और इलाज में काम आने वाले उपकरणों के मनमाने रेट नहीं वसूल सकेंगे।
हेल्थ मिनिस्टर सत्येंद्र जैन ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में 5 रुपये के आइटम के लिए 100 रुपये या इससे भी ज्यादा कीमत वसूली जाती है। बिल में दस रुपये के ग्लब्स के 500 रुपये तक दिखाए जाते हैं। इस तरह अस्पताल एक से दो हजार पर्सेंट तक मुनाफा कमाते हैं। पिछले साल एक नामी अस्पताल में डेंगू से पीडि़त मरीज के इलाज का बिल 16 लाख रुपये आया, जिसकी जांच में पता चला कि इनमें से 58 पर्सेंट बिल दवाइयों और जांचों का था। इसी तरह की लूट को रोकने के लिए सरकार ने प्रॉफिट कैपिंग पॉलिसी बनाई है।
इसमें दवाइयों और इलाज के उपकरणों के रेट फिक्स किए जाएंगे। एमआरपी से कितने पर्सेंट ज्यादा तक रेट वसूले जा सकते हैं, यह तय होगा। पॉलिसी का ऐलान अगले हफ्ते किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि ऐसा मैकेनिज्म बनाया गया है कि अस्पताल को तय लिमिट में ही दवाइयों की कीमत तय करने का अधिकार मिले। मरीज को भर्ती से मना करने जैसी बातों से निपटने के भी उपाय इस पॉलिसी में किए गए हैं। सूत्र बताते हैं कि अस्पताल कर्मियों के बर्ताव के बारे में भी प्रोटोकॉल बनाया जाएगा। दिल्ली सरकार ने पिछले साल 9 मेंबर्स की एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी, जिसने दिल्ली में डायग्नोस्टिक सेंटर्स के रेट की स्टडी की। कमेटी ने सिफारिशों में कहा कि ऐसी दवाओं (जिनका एमआरपी तय करने में सरकार का कोई रोल नहीं होता) में अस्पतालों का प्रॉफिट पर्चेज कॉस्ट से 50 पर्सेंट से ज्यादा न हो। साथ ही, जांचों के मनमाने रेट नहीं वसूले जाएं।