जनऔषधि सेंटर पर 60 फीसदी तक सस्ती दवाएं 

नई दिल्ली। सरकारी कंट्रोल के बावजूद दवाओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। छोटी-मोटी बीमारी में भी दवाएं कई बार इतनी महंगी पड़ती हैं कि आम आदमी का पूरे महीने का बजट गड़बड़ा जाता है। कई दवाओं पर प्रॉफिट मार्जिन 1700 फीसदी तक लिए जाने का भी खुलासा हो चुका है। एनपीपीए के डिप्टी डायरेक्टर आनंद प्रकाश के अनुसार निजी अस्पताल 5 रुपए की दवा खरीदते हैं और इस पर एमआरपी 106 रुपए कर देते हैं। वहीं, 13.64 रुपए की सीरिंज खरीदकर उसकी एमआरपी 189.95 कर दी जाती है।
उनकी रिपोर्ट में ऐसी सैकड़ों दवा या कंज्यूमेबल्स का जिक्र है, जिन पर 250 फीसदी से 1737 फीसदी तक मार्जिन लिया गया है। यानी मरीजों की जेब 17 गुना ज्यादा काटी गई। जबकि पांच ऐसे मार्केट प्लेस हैं जहां आपको आम कैमिस्ट के मुकाबले सस्ते दाम पर दवाएं मिल सकती हैं। इनमें एक स्टोर जन औषधि केंद्र ऐसा भी है, जहां आपकी दवा का खर्च आधे से भी कम हो जाएगा। लोगों को वाजिब कीमत पर सस्ती दवा मुहैया करने के इरादे से मोदी सरकार ने 3 हजार जन औषधि केंद्र खोले हैं।
यहां 130 रुपए की क्रीम 20 रुपए में और बाजार में 30 रुपए में बिकने वाली दर्ज की गोली 3 रुपए में मिल सकती है। उदाहरण के लिए स्किन के लिए यूज होने वाला कैलामाइन लोशन जिसकी ब्रांड मार्केट में 120 एमएल की कीमत करीब 160 रुपए है, वहीं जनऔषधि सेंटर पर यह मात्र 20 रुपए का है