वैज्ञानिकों ने खोजी ‘मधुमेह जडऩाशक’ आयुर्वेदिक गोली

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  • आयुष 82 डाइबा ट्रीट टेबलेट नामक गोली को  वैज्ञानिक देखरेख में सफल परीक्षण के बाद बाजार में उतारा
डाइबिटिज यानी मधुमेह से पीडि़त साढ़े छह करोड़ भारतीय मरीजों का रोग हरने वाली 5 रुपये की आयुवेर्दिक गोली बाजार में आ गई है। जिस पर सेंट्रल काउंसिल रिसर्च ऑफ आयुर्वेदा साइंस,  काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंड्रस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) से जुड़ी दो प्रयोगशालाओं के साथ-साथ, नेशनल बोटेनिकल रिसर्च (एनबीआरआई) तथा सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमेटिक प्लांटस जैसे नामी संस्थानों के वैज्ञानिकों ने डेढ़ साल तक राजधानी समेत कई राज्यों में एक हजार लोगों पर सफल परीक्षण किया है। परीक्षण के बाद दिल्ली के अलावा, हिमाचल, हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक आदि राज्यों में वैज्ञानिकों ने पाया कि 5 रुपये की इस आयुर्वेदिक गोली के 3-4 दिन सेवन से ही 67 प्रतिशत लोगों का मधुमेह लेवल नॉर्मल हो गया।
सुखद अहसास देने वाली आयुष 82 डाइबा ट्रीट टेबलेट नामक यह ‘गोली’ मधुमेह रोगियों के लिए रामबाण साबित होगी, जिसे आयुष मंत्रालय  की मुहर के बाद उत्तर भारत में ‘लॉन्च’ कर दिया गया है।  खास बात , इस आयुर्वेदिक दवा के कोई साइड इफेक्ट नहीं है।  शत प्रतिशत  केमिकल रहित यह गोली जीएमपी सर्टिफाइड है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि डॉक्टरी सलाह पर मधुमेह टाइप टू के रोगियों को पहले से चल रहे इलाज के अलावा इसका सेवन करना है। बता दें कि भारत में 85 प्रतिशत से 95 प्रतिशत टाइप टू मधुमेह से पीडि़त है। इस अवस्था में शरीर के भीतर इंसुलिन बहुत कम बनने लगता है या यूं कहें कि शरीर इसका इस्तेमाल ही नहीं कर पाता। इसके अलावा शरीर में ग्लूकोज कोशिकाओं तक न पहुंचकर सीधा खून में मिलने लगता है। भारतीय चिकित्सा एवं दवा बाजार में इसे मधुमेह के लिए ‘महाऔषधि’ बताया जा रहा है। आयुर्वेदिक चिकित्सकों  का कहना है कि इस आयुर्वेदिक गोली के सेवन के साथ-साथ यदि आहार संतुलन और योग-प्राणायाम भी मनुष्य करें तो मधुमेह अतिशीघ्र जड़ से खत्म हो सकता है।
अधिक जानकारी के लिए आप संपर्क कर सकते हैं :  9896032221  
कारण: मीठे खाद्य पदार्थों का बेतरतीब अत्याधिक सेवन
तला हुआ, अपाच्य भोजन का सेवन
ठंडे-मीठे पेय पदार्थों की मात्रा अधिक ग्रहण करना
लक्षण:  भूख अधिक लगना
प्यास बार-बार लगना
मुंह मीठा लगना
मुत्र बार-बार और अधिक आना
वजन कम एवं शरीर में खुजली-संक्रमण  होना
घाव  देरी से भरना
बचाव: सुपाच्य भोजन का सेवन करें
भूख से ज्यादा भोजन न खाएं
नियमित व्यायाम एवं योग क्रियाएं अपनाएं
दिन में सोने से परहेज करें
जितना हो सके सुबह घास पर चलें