एम्स अपने डॉक्टरों को दे रहा ‘दर्द’

नई दिल्ली: उपचार में देरी और सुविधाओं के अभाव में मरीजों की बढ़ती पीड़ा की खबरों से तो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) अकसर चर्चा में रहता है, लेकिन अब असुविधाओं से पीडि़त एम्स के डॉक्टरों का ‘दर्द’ मीडिया की सुर्खियों में है। मरीजों की ही तरह डॉक्टर भी एम्स की चौखट से मायूस होकर निजी अस्पतालों की शरण ले रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, करीब एक साल के भीतर 10 सहायक प्रोफेसरों ने निजी कारणों का हवाला देकर एम्स की सेवा से स्थायी मुक्ति ले ली। वजह एम्स में उन्हें अनुकूल माहौल नहीं मिल पाया। एम्स फैकल्टी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सीएस बल नि:संकोच कहते हैं कि नए डॉक्टरों के लिए एम्स में आवास सुविधा बड़ी समस्या है। अस्पताल परिसर में उनके लिए चिकित्सीय कक्ष भी उपलब्ध नहीं है। यदि वह किसी रोगी का ऑपरेशन करना चाहें तो महीनों बाद उन्हें ऑपरेशन थिएटर नसीब होता है। पिछले दो साल में 300 फैकल्टी नियुक्त किए गए हैं और तमाम इन असुविधाओं के शिकार हैं। इस बाबत प्रबंधन को कई दफा लिखित पत्र दिया गया, लेकिन निदान अब भी ‘लाईलाज’ है।
सोचने वाली बात है कि जब चिकित्सक ही ‘पीडि़त’ होगा तो वह रोगी की पीड़ा कैसे दूर करेगा। सरकारी ढर्रे से आहत डॉक्टर निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं, क्योंकि यहां उन्हें वे सब सुविधाएं मिलती है, जिसकी दरकार उन्हें होती है। तो क्या ये समझा जाए कि एम्स जैसे बड़े अस्पताल, जहां सेवा करना किसी भी मेडिकल स्टूडैंट की पहली ख्वाहिश होती है, अब ट्रेनिंग सेंटर टाइप हो चले हैं कि आओ, अनुभव लो और फिर निजी अस्पतालों या विदेश का रास्ता नाप लो।
सवाल यह कि इसमें सरकार और प्रबंधन को कसूरवार ठहराया जाए, जो अकसर यह रोना रोते हैं कि सरकारी अस्पतालों को अच्छे चिकित्सक नहीं मिलते, या फिर सरकारी सस्थानों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी, सरकारी अस्पतालों में सेवा देने से केवल इसलिए संकोच करते हैं कि उन्हें सेवा करने का अनुकूल माहौल सरकार उपलब्ध नहीं करवा पा रही।
उल्लेखनीय है कि पिछले कई दिनों से देशभर में रेजीडेंट डॉक्टर भी वेतन विसंगतियों को लेकर सरकार को कोस रहे हैं। रेजीडेंट डॉक्टर सरकार के साथ-साथ अस्पताल प्रबंधन के रवैये से भी नाखुश दिखाई दे रहे हैं कि नीति निर्धारण में दोनों ही एक-से हैं।
खैर, इन सब वजहों से एम्स पर फिर उंगलिया उठ रही हैं। एम्स फैकल्टी एसोसिएशन ने नई नियुक्तियों प्रक्रिया रोक कर पहले सुविधाएं दुरुस्त किए जाने की मांग उठाई है, ताकि स्वास्थ्य सेवा की राह सुलभ हो सके।