दवा की बिक्री घटने से सन फार्मा को सदमा

मुंबई। प्रमुख विशेषीकृत दवाओं की बिक्री घटने और मूल्य में कमी के चलते सन फार्मा के राजस्व और आय पर दबाव बढ़ गया है। माना जा रहा है कि सन फार्मा के जेनेरिक कारोबार पर बढ़ते दबाव के बीच विशेषीकृत दवाओं से उसकी राजस्व वृद्धि होती है। ऐसे में विशेषीकृत दवाओं के कारोबार में किसी भी रुकावट से उसकी आय प्रभावित होगी। ऐसी ही एक विशेषीकृत दवा एब्सोरिका है जिसका इस्तेमाल मुहांसे के इलाज में किया जाता है। डॉयचे बैंक के कार्तिक मेहता का कहना है कि मार्च तिमाही के दौरान एब्सोरिका से प्राप्त राजस्व इससे पिछली तिमाही के मुकाबले 26 फीसदी घटकर 8.9 करोड़ डॉलर रह गई। एब्सोरिका सन फार्मा की एक प्रमुख दवा है जिसकी बिक्री वित्त वर्ष 2018 में करीब 20 करोड़ डॉलर रही थी। कोटक सिक्योरिटीज के विश्लेषकों के आकलन के अनुसार एब्सोरिका से प्राप्त राजस्व में पिछली तिमाही के मुकाबले 3 से 6 करोड़ डॉलर की कमी हो सकती है। उनका कहना है कि इससे साफ पता चलता है कि प्रचार-प्रसार कम होने से बिक्री प्रभावित हुई है। सन फार्मा द्वारा इस दवा के प्रचार-प्रसार में नरमी बरते जाने के कारण महज एक तिमाही के भीतर उसकी बाजार हिस्सेदारी 10 फीसदी घटकर 12 फीसदी रह गई। विश्लेषकों का मानना है कि यह सन फार्मा की एक प्रमुख दवा है और इससे प्राप्त राजस्व में अधिक गिरावट की भरपाई अन्य नई विशेषीकृत दवाओं के जरिये की जा सकती है।
 कंपनी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषीकृत दवा टिल्ड्रा है जिसका इस्तेमाल जलन के उपचार में किया जाता है। हालांकि कंपनी इसके विकास और खरीदारी पर 30-35 करोड़ डॉलर पहले ही खर्च कर चुकी है, लेकिन बाजार में इसे स्थापित करना कंपनी के लिए चुनौती होगी। पिछले दो साल में बेहतर प्रभाव के साथ पांच ऐसी दवाएं बाजार में पहले ही आ चुकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि टिल्ड्रा को इसी वित्त वर्ष के दौरान बाजार में उतारा जाएगा  सन फार्मा के राजस्व में तेजी के मुद्दे पर तमाम विश्लेषक उलझन में दिख रहे हैं और इसकी झलक उसके शेयर में आई गिरावट में भी मिलती है। पिछले एक साल के दौरान शेयर मूल्य में 27 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। हालांकि फिलहाल यह शेयर वित्त वर्ष 2019 के लिए उसके आय अनुमान (वित्त वर्ष 2020 के अनुमान के मुकाबले 19 गुना) के मुकाबले 25 गुना अधिक मूल्य पर कारोबार कर रहा है।