निजी दुकानों पर ब्लैक में बिक रही ‘दर्द की दवा’

आगरा। दवा बाजार में एंटीबायोटिक से लेकर एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) की भारी कमी चल रही है। ये दवाएं एमआरपी से अधिक रेट पर ब्लैक में बेचा जा रहा है। इससे मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। बताया जा रहा है कि दर्द की दवा ट्रमाडोल के नारकोटिक्स की श्रेणी में आने के बाद दवा कारोबारियों ने इसे स्टॉक कर लिया है। इन दवाओं की बिक्री पर मरीज और डॉक्टर का अलग रजिस्टर में ब्योरा दर्ज करना पड़ता है। इससे बचने के लिए मेडिकल स्टोर संचालक बिना बिल की दवाएं खरीदते हैं। बिना बिल के ट्रमाडोल कॉम्बीनेशन थोक दवा बाजार में एमआरपी से डबल रेट पर बिक रहे हैं। वहीं, जेनेरिक कोडीन कफ सीरप दोगुने से ज्यादा रेट पर बेचे जा रहे हैं। इसी तरह से आई ड्रॉप से लेकर मल्टीविटामिन की कुछ ब्रांड एमआरपी से अधिक रेट पर बिक रही हैं।
दवाओं के ब्लैक में बिकने पर अधिकांश मेडिकल स्टोर संचालकों ने खरीदना बंद कर दिया है। ये दवाएं मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं। रैबीज वैक्सीन की मांग बढ़ने पर इसका काला कारोबार शुरू हो गया है। नकली के साथ हॉस्पिटल सप्लाई की वैक्सीन की बिक्री भी की जा रही है। जिला अस्पताल में भी मरीजों को दवाएं नहीं मिल रही हैं। यहां खांसी की दवाओं से लेकर बुखार की टेबलेट और एंटीबायोटिक खत्म हो गई हैं। मरीजों को कफ सीरप नहीं दिए जा रहे हैं। नियमानुसार अस्पताल में 100 से अधिक दवाएं होनी चाहिए, लेकिन 18 तरह की दवाएं ही उपलब्ध हैं। इस मामले में अस्पताल के एसएमओ ने कहा कि एमआरपी से अधिक रेट पर दवाओं की बिक्री नहीं की जानी चाहिए। ब्लैक में दवा बेच रहे विक्रेताओं पर कार्रवाई की जाएगी।