मासूमों की मौत पर तीन आरोपी डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन कैंसिल 

जबलपुर। मेडिकल कॉलेज में संक्रमित खून चढ़ाने से हुई तीन मासूमों की मौत के मामले में जांच रिपोर्ट आ गई है। मप्र शासन की उच्च स्तरीय कमेटी की इस जांच रिपोर्ट में तीनों डॉक्टरों की लापरवाही साबित हुई है। मप्र शासन ने रजिस्ट्रार मप्र मेडिकल काउंसिल भोपाल को निर्देश देकर तीनों डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने को कहा है।
गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज में मार्च 2012 में संक्रमित खून चढ़ाने से थैलेसीमिया और सिकल सेल से पीडि़त तीन बच्चों की मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप था कि डॉक्टरों ने इलाज में भी लापरवाही की। शिकायत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजिस्ट डॉ. एस. जैन, शिशु रोग विभाग की माया चंसोरिया एवं डॉ. बीके भारद्वाज को दोषी पाया गया है। जानकारों के अनुसार वे शासकीय संस्थान में सेवा या प्राइवेट प्रैक्टिस करने योग्य नहीं रहेंगे। शिशु रोग विभाग की पूर्व एचओडी डॉ. माया चंसोरिया रिटायर हो गई हैं। शिशु रोग विभाग में स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति के आवेदन के बाद डॉ. बीके भारद्वाज प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। जबकि, पैथोलॉजी विभाग में तैनात डॉ. एस जैन के खिलाफ जांच हुई।
मप्र शासन ने मेडिकल कॉलेज की स्वशासी समिति से पीडि़त परिजनों को तीन-तीन लाख मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। पीडि़त बच्ची नौ साल की कशिश के चाचा विवेक गौरव अग्रवाल ने बताया कि छह वर्ष पूर्व हुई मौत के मामले में मुआवजा देने के लिए मेडिकल कॉलेज ने जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र मांगा है। जबकि, नगर निगम कर्मियों का जवाब है कि 2007 से ही मेडिकल कॉलेज में मृत्यु होने पर प्रमाण पत्र वहीं से दिया जा रहा है। इस मामले में डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने बताया कि तीन पीडि़त परिजनों में दो उपस्थित हो गए हैं। पूरी तरह जांच पड़ताल के लिए प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं। नगर निगम में प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा तो मेडिकल कॉलेज के रिकॉर्ड को आधार माना जाएगा।