करार तोड़ने वाले डॉक्टरों की खैर नहीं !

देहरादून। सरकारी खर्चे से एमबीबीएस की डिग्री लेकर उत्तराखंड के अस्पतालों में सेवाएं न देने वाले डॉक्टरों पर अब सरकार श्किंजा कसने जा रही है। इन सभी चिकित्सकों को चिन्हित किया जा रहा है। करार तोडऩे वाले जिन डॉक्टरों ने 2017 से पहले एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है, उनसे 30 लाख रुपये और 2017 और उसके बाद कोर्स पूरा करने वाले डॉक्टरों से एक करोड़ रुपये जुर्माने के रूप में वसूल करने की तैयारी है। इतना ही नहीं, इन चिकित्सकों का रजिस्ट्रेशन भी कैंसिल किया जा सकता है। गौरतलब है कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए सरकार ने एमबीबीएस, एमडी समेत अन्य मेडिकल संबंधी पढ़ाई को सस्ती फीस पर कराने का प्रावधान रखा है।
सरकारी योजना के तहत मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों से बांड भराया जाता है, जिसके मुताबिक छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद एक निश्चित समय के लिए प्रदेश में अपनी सेवाएं देना अनिवार्य है। बावजूद इसके अधिकांश मेडिकल के छात्र इस बांड का अनुपालन नहीं कर रहे हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद ये छात्र निजी क्षेत्र अथवा अन्य राज्यों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कुछ समय पहले स्वास्थ महकमे ने इनका रिकार्ड निकाला था। इसके अनुसार, सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पास आउट होने वालों में से इस वर्ष जनवरी तक केवल 244 ने ही अस्पतालों में तैनाती दी थी। 213 ने तैनाती नहीं दी जबकि 218 ऐसे पाए गए, जिनके संबंध में कोई जानकारी थी ही नहीं।
इस पर सख्ती दिखाते हुए स्वास्थ्य विीााग ने अनुपस्थित रहे सभी डॉक्टरों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर तैनाती देने के निर्देश दिए। इनमें से तकरीबन सौ डॉक्टर तैनाती दे चुके हैं। शेष अभी भी अपनी सेवाएं नहीं दे रहे हैं। इसे देखते हुए अब शासन ने ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि जिन डॉक्टरों ने अनुबंध का पालन नहीं किया है, उनका संज्ञान लिया गया है। उनसे एक बार फिर से अपनी सेवाएं देने का आग्रह किया जा रहा है। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।