भारत में कैंसर का स्याह सच: 6.8 लाख सालाना मौत, राहतकोष में घोटाला

मुख्यमंत्री राहतकोष से आई राशि का पीजीआई में ‘भ्रष्ट खेल’, प्रधानमंत्री कार्यालय की निगरानी
चंडीगढ़: एक तो भारत में कैंसर का कहर बढ़ रहा है, असमय लोग मौत का शिकार हो रहे हैं, दूसरी तरफ इस बीमारी से पीडि़त रोगियों के लिए पीजीआई जैसे बड़े अस्पतालों में सरकारी राहतकोष से आने वाले पैसों में भ्रष्टाचार हो, सुधार के सारे दावे बेमानी लगते हैं।
दरअसल, राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने लिखित जानकारी दी कि भारत में हर साल 6.8 लाख विभिन्न प्रकार के कैंसर से मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं, जबकि 10 लाख से ज्यादा मामले कैंसर के सामने आ रहे हैं, वहीं पीजीआई चंडीगढ़ में केंद्र और राज्य सरकारों से कैंसर का इलाज करवाने वाले गरीब मरीजों को मिलने वाली राहतकोष राशि में घोटाला होने की बात सामने आई, जिसकी जांच प्रधानमंत्री कार्यालय की निगरानी में चल रही है।
दरअसल, पिछलों दिनों पीजीआई चंडीगढ़ में पता चला कि मरीज स्वयं यदि दवा खरीद रहे हैं तो सस्ती मिलती है जबकि चीफ मिनिस्टर रिलीफ फंड से मरीज का इलाज होता है तो पीजीआई बाजार से दोगुणे रेट पर मिल रही दवाओं से मरीजों का इलाज कर रहा है। जिससे अधिक संख्या में रोगी राहतकोष का लाभ नहीं ले पा रहे हैं, क्योंकि गलत इस्तेमाल से राहतकोष खाली हो रहा है। पीजीआई में चल रहे इस ‘धंधे’ की खबर जैसे ही मीडिया में आई तो पीजीआई मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट्स एसोसिएशन के महासचिव अश्वनी मुंजाल ने प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायत भेजी। पीएमओ से इस खेल की जांच कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए।  यूं सामने आया मामला: करीब 54 वर्षीय मरीज इंदिरा कुमारी के कैंसर इलाज के लिए 6 कीमोथेरेपी के चक्र पूरे होने थे। डॉक्टरों ने 7 साइकिल की कीमोथेरेपी का एस्टीमेट 80 हजार के आसपास बताया। लेकिन उनके पास कीमोथेरेपी का खर्च उठाने का सामथ्र्य न होने की वजह से पंजाब के कैंसर कंट्रोल सैल के मुख्यमंत्री पंजाब कैंसर राहत कोष से 80 हजार की मदद मांगी गई। लेकिन ये मदद आने से पहले ही इंदिरा कुमारी की कीमोथेरेपी जल्दी करवाने की जरूरत पड़ गई। मरीज इंदिरा कुमारी ने कीमोथेरेपी के दो सेशन अपने खर्च से करवाए।
कीमोथेरेपी पिछले साल हुए 3 सितंबर के लिए सेक्टर 11 की केमिस्ट शॉप कुमार ब्रदर्स से खरीदी गई दवाओं का खर्च 13 हजार 200 रुपए आया। अभी भी पंजाब सरकार से मदद की राशि नहीं मिली थी। तो मरीज इंदिरा कुमारी की एक अक्टूबर को हुई दूसरी कीमोथेरेपी के लिए फिर इंदिरा के पति ने अपने खर्च से किसी तरह कीमोथेरेपी के लिए जरूरी सामान कुमार ब्रदर्स से ही खरीदा। इस बार भी बिल 13 हजार 825 रुपए आया।
आखिरकार पंजाब सरकार की ओर से इंदिरा कुमारी की कीमोथेरेपी के लिए 80 हजार रुपए की ग्रांट पीजीआई के प्राइवेट ग्रांट सैल में आ गई। ग्रांट आने के बाद इंदिरा कुमारी की 29 अक्टूबर को होने वाली कीमोथेरेपी के लिए रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉक्टर ने प्राइवेट ग्रांट सैल को जरूरी दवाओं और सामान जुटाने के लिए पत्र लिखा। इसके बाद प्राइवेट ग्रांट सैल ने इंदिरा कुमारी की अगली तीनों कीमोथेरेपी 29 अक्टूबर, 27 नवंबर और 28 दिसंबर के लिए पंजाब सरकार से आई ग्रांट से दवाएं और जरूरी सामान दिया। इंदिरा देवी की पिछले महीने 30 जनवरी को होने वाली कीमोथेरेपी के लिए प्राइवेट ग्रांट सैल से दवाएं और दूसरा जरूरी सामान देने के लिए कहा तो प्राइवेट ग्रांट सेल से बताया गया कि इंदिरा कुमारी के इलाज के लिए पंजाब सरकार से आया पैसा तो लगभग खत्म हो चुका है। सिर्फ 3181 रुपए बचे हैं। गरीबों के इलाज के लिए सरकारी राहत राशि के खेल में प्रधानमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप से क्या हालात सुधरेंगे यह आगे देखने वाली बात होगी।