पर्ची पर सिर्फ ब्रांड का नाम लिख रहे डॉक्टर

सागर। बीएमसी में दो महीने पहले शुरू हुई अमृत फॉर्मेसी से मरीजों को दवाएं नहीं मिल पा रही हंै। इससे मरीजों का रुझान धीरे-धीरे कम हो रहा है। सरकार ने मरीजों को सस्ती दरों पर जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए यह सुविधा शुरू की थी, लेकिन यह मरीजों के लिए कारगर साबित नहीं हो रही है। इसके पीछे कमीशनबाजी का खेल बताया जा रहा है। दरअसल, बीएमसी के डॉक्टर मुनाफे के लिए जो दवाएं लिख रहे हैं, उनमें सिर्फ ब्रांड का नाम ही लिखा जा रहा है। उधर, अमृत फॉर्मेसी में सिर्फ ड्रग के आधार वाली दवाएं उपलब्ध हैं।
मरीज सिर्फ उसी दवा पर यकीन करता है, जो डॉक्टर ने पर्चे पर लिखकर दी है। ऐसे में फॉर्मासिस्ट की बात भी मरीज नहीं मान रहे हैं। यही वजह है कि अभी भी निजी दवा दुकानों पर मरीज ब्रांड की दवाओं के नाम पर लुट रहे हैं। बीएमसी के अधिकांश डॉक्टर मरीज की दवा पर्ची पर सिर्फ दवाओं का ब्रांड लिख रहे हैं। ऐसे में जब मरीज यहां पर दवा लेने के लिए जाता है तो उसे उस ब्रांड की दवा नहीं मिलती है। यहां तैनान फॉर्मासिस्ट जब मरीज को यह बताते हैं कि दवा वही है और उससे बेहतर है, तब भी मरीज रुचि नहीं दिखाते हैं।
यहां पर लाइफ सेंविग दवाएं भी काफी कम दर पर मिलती है, जिसका लाभ डॉक्टरों की कमीशनबाजी के कारण मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। यहां पर कैंसर, हार्ट, लंग्स इन्फेक्शन जैसी महंगी दवाएं काफी कम दरों पर उपलब्ध है। कैंसर के लिए 27 हजार वाले जो इंजेक्शन यहां मिलते हैं। उनकी मार्केट में कीमत 55 हजार रुपए है। लंग्स कैंसर की दवा यहां 44 सौ रुपए में उपलब्ध है जबकि दवा दुकान में इसकी कीमत 12 हजार रुपए है। बता दें कि बीएमसी में 700 मरीजों की ओपीडी है, लेकिन यहां पर औसतन दिन में 70 मरीज ही दवा लेने के लिए जा रहे हैं। इनमें से कई मरीजों के हिसाब से दवा नहीं मिलती है। इंचार्ज नीलेश नरवरिया ने बताया कि यह सरकार की स्कीम है। हम सिर्फ डॉक्टरों को कन्वेंस कर सकते हैं। यहां की रिपोर्ट अच्छी नहीं है। सिर्फ10 हजार रुपए की दवा प्रतिदिन बिक रही है, जबकि 1 हजार प्रकार की दवाएं यहां उपलब्ध हैं।