रेड के दौरान दवा फर्मो का रिकॉर्ड हुआ गायब

बरेली। थोक बाजार खुलने पर औषधि प्रशासन विभाग ने फिर से दवा फर्मो पर छापेमारी की। खांसी की दवा फेंसीडिल और अन्य नारकोटिक्स से प्रतिबंधित सॉल्ट की दवाइयों की तलाश में गली नवाबान में टीम पहुंची। वहां दो फर्मो ने पिछले दो माह के भीतर 60 हजार से फेंसीडिल सीरप की शीशियां मंगाई गई थीं, जो छोटे मेडिकल स्टोरों को बेची गई। टीम ने इनके पर्चे देखे। इसके अलावा अलग-अलग जगह से चार लाख के सीरप, टैबलेट और दवाइयां सीज कर दी गई। फर्मो को पर्चे दिखाने का नोटिस जारी किया है। औषधि सुरक्षा के साथ ही नारकोटिक्स विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से छापे मारे थे। एक दिन छोडऩे के बाद फिर से कार्रवाई के लिए तीन जिलों की टीमें बुलाई गई। लेकिन, केवल बदायूं के ड्रग इंस्पेक्टर नवनीत कुमार पहुंचे। बरेली की औषधि निरीक्षक उर्मिला वर्मा और बदायूं की टीम बाजार में पहुंच गए। अरोड़ा एजेंसी, यूनिक ट्रेडर्स, लखनऊ ड्रग एजेंसी, जुबली ड्रग्स थोक दवा प्रतिष्ठान में निरीक्षण किया।
गली नवाबान चौक के पास स्थित अरोड़ा एजेंसी में दवाओं के स्टॉक में फेंसीडिल का 55 हजार शीशियों का रिकॉर्ड मिला। जोकि महज दो महीने के भीतर खरीदी गई। अप्रैल से जून के बीच यह दवाइयां एबोट कंपनी से ट्रांसपोर्टर के जरिये मंगाई गई थी। हालांकि, मेडिकल स्टोरों के नाम पर बिक्री के पर्चे भी दिखाए हैं। ज्यादातर डिमांड ऑर्डर शाहजहांपुर, नवाबगंज, पीलीभीत आदि के दवा विक्रेताओं के थे। यूनिक फार्मा में 5000 शीशियों का रिकॉर्ड मिला है। यह दवाई 14 जून को ही मंगाई गई थीं।
चौक के पास स्थित थोक दवा कारोबारी लखनऊ ड्रग एजेंसी में टीम को फेंसीड्रिल या कोडेन फॉस्फेट के प्रतिबंधित सॉल्ट वाली कोई दवाई नहीं मिली। लेकिन, यहां पर्चो और स्टॉक में बड़ा अंतर पकड़ा गया। ट्राइका, ट्राइवान, कोरेक्स, एटीवॉन, रायजीपॉम दवाइयों के पर्चे ही पूरे नहीं दिखा सके। टीम ने तीन लाख 15 हजार 311 रुपये मूल्य की दवाइयों की बिक्री पर रोक लगाकर सीज कर दीं। जुबली फम में भी 12543 रुपये मूल्य की दवाइयों के पर्चे नहीं मिले। इसे भी सीज किया। शास्त्री मार्केट के थोक व्यापारियों की दुकानों और गोदाम पर छापे मारे गए थे। ठीक एक दिन बाद ही बाजार की साप्ताहिक बंदी पड़ा। बाजार के जानकारों के मुताबिक छुट्टी में शास्त्री मार्केट से लेकर गली नवाबान स्थित थोक फर्मो के प्रतिष्ठान बाहर से तो बंद रहे, लेकिन स्टॉक और गोदामों से बिना पर्चो के खरीद, बिक्री का रखा माल हटा दिया गया।