ड्रग ट्रायल मामले में सात डॉक्टरों को कोर्ट से राहत

रतलाम (मप्र)। ड्रग ट्रायल के मामले में एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सात डॉक्टरों को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने पिछले साल जुलाई में मेडिसिन, मनोरोग और शिशु रोग विभाग के इन डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन तीन माह के लिए निलंबित करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने अंतिम आदेश जारी कर एमसीआई की पूरी कार्रवाई निरस्त कर दी। डॉक्टरों ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में याचिका लगाई थी। डॉक्टरों का कहना था कि उनका पक्ष सुना ही नहीं गया। इससे पहले कोर्ट ने डॉक्टरों को स्टे दिया था। मेडिकल कॉलेज के इन सात डॉक्टरों में मनोरोग विभाग के डॉ. वीएस पाल, डॉ. पाली रस्तोगी, डॉ. उज्ज्वल सरदेसाई, डॉ. अभय पालीवाल, मेडिसिन विभाग के डॉ. अनिल भराणी, डॉ. आशीष पटेल और डॉ. हेमंत जैन शामिल हैं। जस्टिस एससी शर्मा की बेंच ने एमसीआई की कार्रवाई को सही नहीं मानते हुए इसे निरस्त कर दिया। सीनियर एडवोकेट सुनील जैन ने चार और एडवोकेट मनोज मुंशी ने तीन डॉक्टरों की तरफ से याचिका दायर की थी। जैन के मुताबिक, ड्रग ट्रायल मामले में अनियमितता पर एमसीआई ने जुलाई 2017 में इनका रजिस्ट्रेशन तीन महीने के लिए निलंबित करने का निर्देश मप्र की मेडिकल काउंसिल (एमपी एमसी) को दिया था। एमपी एमसी ने न कार्रवाई की न कोर्ट में जवाब पेश किया।
एमसीआई ने यह पत्र लिखकर मामला अटका दिया कि एक डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन नंबर गलत लिखा है। वहीं, डॉक्टरों का कहना था कि 2013 में ही उन्होंने एमसीआई को ड्रग ट्रायल संबंधी पूरे दस्तावेज उपलब्ध करवाए थे। इसके बावजूद चार साल बाद यह कार्रवाई की गई। हाई कोर्ट ने उन्हें तात्कालिक राहत देते हुए स्टे दे दिया था। करीब 11 महीने बाद बुधवार को हाई कोर्ट में इस मामले में सुनवाई हुई।