सर्वोदय अस्पताल का पैगाम बेटी से गोद भरना है इनाम

नई दिल्ली : बेटी से गोद भरना सचमुच अपने आप में एक इनाम है। लेकिन बेटे के मोह में अंधा यह समाज इस सच्चाई को नहीं समझता। फरीदाबाद के मल्टीस्पैशियैलिटी अस्पताल सर्वोदय ने इसे रेखांकित करने के लिए जुग जुग जियो बेटी नामक एक अलहदा योजना शुरू की है। इसके तहत अस्पताल 25 बेटियों की मुफ्त डिलिवरी कराएगा। एक ऐसे राज्य हरियाणा में जिस पर कन्या भ्रूण हत्या का बदनुमा दाग लगा हो, वहां ऐसी मिसाल इस बात की मुनादी है कि बेटियों को लेकर समाज की सोच बदल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के  बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ मुहिम की दिशा में सर्वोदय अस्पताल की यह पहल पूरे देश में अलख जगाने वाली है।
अस्पताल के चेयरमैन एवं मेडिकल निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता ने अस्पताल के 25 साल पूरे होने के मौके पर बेटी जनने वाली मां के लिए इस इनामी योजना की घोषणा की। डॉ. गुप्ता ने कहा कि बेटी के जन्म के प्रति लोगों की नकारात्मक सोच को बदलने की दिशा में अस्पताल ने यह पहल की है। बेटी का जन्म लेना खुशी का मौका होना चाहिए लेकिन यह विडंबना ही है कि उसके जन्म होने पर माता पिता दुखी हो जाते हैं। आज बेटियां हर क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़ कर माता पिता के नाम रौशन कर रही हैं। इतना ही नहीं वही माता पिता की लाठी भी बन रही हैं लेकिन फिर भी बेटे का मोह छूटने का नाम नहीं ले रहा। इस मोह को तोड़ने के लिए हर क्षेत्र को आगे आना होगा। इस मामले में अस्पताल की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

फरीदाबाद के सेक्टर 16 में एक क्लिनिक के रूप में शुरू सर्वोदय अस्पताल आज एक सुपरस्पेशियैलिटी अस्पताल में तब्दील हो चुका है। वह अब विश्वस्तरीय इलाज मुहैया कराने का दावा भी कर रहा है लेकिन डॉ. गुप्ता कहते हैं- बीमारी से पैसा कमाना इस अस्पताल का ध्येय कतई नहीं है। हमने सस्ते दर में मरीजों को उत्कृष्ट इलाज मुहैया कराने के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह अस्पताल बनाया है ताकि राज्य के आसापास के लोगों को इलाज के लिए दिल्ली जाने की जरुरत न पड़े।
डॉ. गुप्ता ने कहा -जैसा कि अस्पताल के नाम से भी जाहिर है, इस अस्पताल का मिशन है- मरीजों को चंगा करना और उसकी देखभाल करना ( क्योरिंग एंड केयरिंग)। लेकिन लड़कियों के मामले में इस अस्पताल ने हमेशा मिसाल कायम की है। स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से फरीदाबाद में इस अस्पताल की बालिका भ्रूण हत्या के खिलाफ और बेटियों को बचाने की मुहिम ने रंग लाया है। डॉ. गुप्ता ने गांवों के सरपंचों की मदद से इसे एक आंदोलन का रूप दे दिया है।