नशीली दवा बेचने के लिए होल सेलर्स का नया फंडा

बरेली। नशा बेचने के लिए होल सेलर्स ने नया रास्ता अख्तियार किया है। नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाली कफ सीरप फेंसीडिल की सप्लाई के लिए होल सेलर अब रिटेल मेडिकल शॉप के नाम पर फर्जी बिल बनाने लगे हैं। इस बात का खुलासा राजेंद्र नगर के नामी मेडिकल होम के मालिक ने प्रेसवार्ता में किया है। उन्होंने बताया कि उनके मेडिकल शॉप के नाम से चार लाख रुपये का फर्जी बिल तैयार किया गया।
शहर के शास्त्री मार्केट में विन्नी मेडिकोज ने शहर के रामजानकी मंदिर के पास ओम मेडिकल के नाम नशीली दवा का 4 लाख से अधिक का बिल बना दिया। मामला पकड़ में आया तो मेडिकल संचालक ने बिन्नी मेडिकोज से इसकी शिकायत की। जिस पर विन्नी मेडिकोज ने अपनी गलती मानते हुए बिल निरस्त कराने की बात लिखित में कही। उधर, बरेली रिटेलर केमिस्ट वेलफेयर सोसायटी ने भी प्रेसवार्ता कर यही बात कही है।
सोसायटी के पदाधिकारियों ने बताया कि शहर में फेंसीडिल व अन्य नशीली दवाओं की बिेी पर प्रतिबंध है। मगर फुटकर व्यापारियों को सप्लाई के नाम पर इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। यह दवा केवल डॉक्टर के पर्चे को देखने के बाद दी जाती है। नवाबगंज और आसपास के रिटेलर के नाम फर्जी बिल बनाए जा रहे हंै, जो एक गंभीर मामला है। दवा व्यापारियों ने इसकी जांच और दोषी के खिलाफ कार्रवाई की माग की है।
गौरतलब है कि नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेन्सेस एक्ट, 1985 (एनडीपीएस) के तहत फेंसीडिल समेत नशा करने वाली तमाम दवाएं बेचने की सख्त प्रक्रिया निर्धारित है। इसके तहत कोडिन युक्त फेंसीडिल जैसे सीरप को बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं बेचा जा सकता। वहीं, रिटेल मेडिकल स्टोर को सेल बिल और पर्चे की फोटोकॉपी का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। यदि फेंसीडिल के होलसेलर के सेल्स बिलों को रिटेल मेडिकल स्टोर की बिलिंग और डॉक्टरों के पर्चे की फोटो कॉपी के रिकॉर्ड से मिलान किया जाए तो बड़ा फर्जीवाड़ा खुल जाएगा।