इसलिए रूकता है बच्चों का शारीरिक एवं बौद्धिक विकास

झांसी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बच्चों में पेट के कीड़े के संक्रमण को एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या माना है। इसके चलते जहां एक ओर बच्चों का शारीरिक और बौद्धिक विकास बाधित होता है, वहीं दूसरी ओर उनके पोषण और हीमोग्लोबीन स्तर पर भी प्रभाव पड़ता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश के एक से 19 साल के 76 प्रतिशत बच्चे कृमि संक्रमण के शिकार हैं। प्रदेश सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए साल में दो बार कृमि मुक्ति कार्यक्रम चलाने का निर्णय लिया है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक पंकज कुमार ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र जारी कर इस वर्ष के पहले चरण का कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन 10 अगस्त को करने को कहा है। इस दौरान बच्चों को पेट के कीड़ों की गोली (एल्बेंडाजोल-400 मिलीग्राम) खिलाई जाएगी। एल्बेंडाजोल दवा के सेवन से एनीमिया में कमी एवं पोषण स्तर में वृद्धि, बच्चों में शारीरिक वृद्धि और वजन बढऩा, मानसिक एवं शारीरिक विकास में बढ़ोत्तरी, अन्य बीमारियों से बचने को प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाना, स्कूल में उपस्थिति बढ़ाने में सहायक होना और बच्चों की याददाश्त में वृद्धि और स्कूल में सक्रिय रहना आदि फायदे होते हैं।