दवा निगम ने सरकार को ऐसे लगाया करोड़ों का चूना 

रायपुर। दवा निगम ने अपनी पसंदीदा कंपनी को लाभ दिलाने के लिए निविदा शर्तें बदल कर सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाया है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन ने वेयरहाउस उपकरण खरीद के लिए निविदा जारी की थी। दवा निगम ने अपनी चहेती कंपनी को लाभ दिलाने के लिए निविदा शर्तों में संशोधन कर डाला। इस संशोधन के अनुसार छत्तीसगढ़ के स्थानीय अनुबंध निर्माताओं (कंट्रेक्ट मैन्युफेक्चर्र) को भी निविदा में भाग लेने के योग्य घोषित कर दिया गया, जबकि इससे पहले सिर्फ उपकरण के निर्माताओं को ही निविदा भरने की अनुमति थी। निगम ने निर्माता कंपनियों से उपकरण खरीद कर कमीशन लेकर बेचने वालों को भी पात्रता दे दी और इस तरह शासन को करोड़ों रुपए का चूना लगा दिया। प्रबंध संचालक के भिलाई स्थित कारोबारी और उनके पुत्रों की फर्मों के लिए नियमों को ताक पर रखकर अयोग्य कंपनियों को योग्य घोषित कर दिया गया और अब तक 20 करोड़ से ज्यादा का क्रय आदेश जारी कर दिया है।
आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने भी निगम के प्रबंध संचालक से उक्त कंपनियों के मालिक से संबंधों के बारे में जानकारी मांगी है लेकिन 3 बार नोटिस जारी करने के बाद भी प्रबंध संचालक ने जानकारी नहीं भेजी है। हैरानी की बात ये है कि निविदा में हिस्सा लेने वाली चारों कंपनियों को योग्य घोषित कर दिया गया। निविदा पूर्व के 5 वर्षों का कंपनी से विनिर्माण अनुबंध अनिवार्य था, लेकिन निविदा में योग्य घोषित दो कंपनियां मोक्षित कारपोरेशन और सीबी कारपोरेशन वर्ष 2017 में ही अस्तित्व में आई थी। ऐसे में इनके पास निविदा के पूर्व का 5 वर्षों का अनुबंध होना असंभव था। बता दें कि सीबी कारपोरेशन पर जाली टर्न ओवर सर्टिफिकेट के माध्यम से निविदा हथियाने के पूर्व में भी आरोप लगे थे, लेकिन कार्य समिति से जांच लेकर बायो मेडिकल इंजीनियर को सौंप दी गई।
यह फाइल कई महीनों से धूल फांक रही है। सीजीएमएसी के प्रबंध संचालक वी रामाराव ने बताया कि निविदा को लेकर कोई गड़बड़ी नहीं की गई है। निविदा शर्तों को लेकर जरूरत के हिसाब से बदलाव किए गए थे। किसी को विशेष लाभ देने के लिए नहीं।