कोरोना के संक्रमण से बचा लेगी दवा EIDD-2801

नई दिल्ली। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कोरोना से लडऩे के लिए नई दवा EIDD-2801 तैयार की है। इसका प्रयोग कोरोनावायरस से संक्रमित चूहों और इंसानी फेफड़ों पर सफल रहा है। यह एक एंटीवायरल ड्रग है जो फेफड़ों के डैमेज को कंट्रोल करती है। अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने इस दवा को इंसानों पर ट्रायल करने की अनुमति दे दी है। कोरोना के लगातार फैलते संक्रमण और दुनियाभर में इससे हो रही मौतों के बीच, नई दवा की कामयाबी से महामारी पर काबू पाने में मदद मिल सकती है।ड्रग तैयार करने वाली इमोरी यूनिवर्सिटी का कहना है इसे टेबलेट के रूप में लिया जा सकेगा। इस दवा से जुड़ी सात बड़ी बातें हैं। शोधकर्ताओं ने नई दवा को रिलीफ ड्रग का नाम दिया है। इसका इस्तेमाल कोरोना संक्रमित मरीजों की अलग-अलग स्थिति में किया जा सकेगा। इमोरी यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबायलॉजी एंड इम्यूनोलॉजी के प्रोफेसर रॉल्फ बेरिक का कहना है यह दवा संक्रमण शुरु होने के 12 से 24 घंटे के अंदर डैमेज होते फेफड़ों को कंट्रोल करने लगती है। इस दौरान यह घटते वजन को भी नियंत्रित करने का काम करती है। चूहे में हुए प्रयोग में इसकी पुष्टि भी हुई है। साइंस ट्रांजेशनल मेडिसिन जर्नल के मुताबिक, दिसम्बर 2019 में दवा की पहली रिपोर्ट में सामने आया कि यह कोरोनावायरस की संख्या को बढऩे से रोकती है। एक दूसरे प्रयोग में साबित हुआ कि इस दवा के कारण वायरस की गतिविधियों पर रोक लग जाती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अभी कोरोना के मरीजों को एंटी-वायरल दवा रेमडेसिवीर दी जा रही है। EIDD-2801 और रेमडेसिवीर दोनों ही दवाओं में काफी समानताएं हैं,लेकिन कई मायनों में EIDD-2801 बेहतर है। वायरस शरीर में अपना जेनेटिक मैटेरियल बढ़ाने के लिए जिस एंजाइम का प्रयोग करता है, यह दवा उसी को ब्लॉक करती है। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह दवा कोरोनावायरस के पूरे समूह के लिए कारगर साबित होगी। इमोरी यूनिवर्सिटी कीओर से जारी एक बयान के मुताबिक, वर्तमान में कोरोना मरीज को दवाएं नसों की मदद से दी जा रही हैं लेकिन नए ड्रग को टेबलेट के रूप में लिया जा सकेगा। शोधकर्ताओं का दावा है कि EIDD-2801 पूरी तरह एंटी-कोरोनावायरस ड्रग है, जो खासतौर पर कोरोना को रोकने के लिए कामकरेगी। फिलहाल वर्तमान में सपोर्टिव ट्रीटमेंट के तौर पर हाडड्रोक्सी क्लोरोक्वीन औरप्लाज्मा थैरेपी दी जा रही है। इसे इंफ्लूएंजा और कोरोनावायरस के दूसरे दो प्रकारों के लिए तैयार किया गया था। लेकिन अब इसे नए कोरोनावायरस के संक्रमण कोविड-19 के इलाज के लिए प्रयोग किया जा रहा है।

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