ज्यादा दामों पर खरीद ली दवाइयां

नई दिल्ली। एमसीडी डिस्पेंसरी में मुफ्त दी जाने वाली दवाइयों की खरीद में लाखों रुपए की हेराफेरी का मामला सामने आया है। साउथ एमसीडी स्टैंडिंग कमिटी की मीटिंग में आम आदमी पार्टी के पार्षद नरेंद्र कुमार ने आरोप लगाया है कि खरीदी जा रही दवाओं में ढेरों ऐसी दवाइयां हैं, जिनकी कीमत सामान्य दरों से 300-400 प्रतिशत तक अधिक है। उनका आरोप है कि जिस 100 टेबलेट के पैकेट का मार्केट रेट 127.9 रुपये है, उसे साउथ एमसीडी का हेल्थ विभाग 1232 रुपये में खरीद रहा है। एमसीडी अफसरों ने भी स्वीकार किया कि 45 दवाइयों के रेट सामान्य दरों की तुलना में अधिक है। ईस्ट और नॉर्थ एमसीडी को मिलाकर 70 दवाइयों का रेट सामान्य से अधिक है। वहीं, अफसरों का तर्क है कि कंपनी बदलने के बाद दवाइयां का रेट भी बदल जाता है। इससे ही दवाइयों के रेट में अंतर दिख रहा है।
पार्षद नरेंद्र कुमार का आरोप है कि साउथ एमसीडी डिस्पेंसरियों के लिए सैकड़ों दवाइयां थोक में खरीद रही हैं। दवाइयों को खरीदने के लिए जो रेट तय किए गए और जो मार्केट रेट है, उसमें जमीन-आसमान का फर्क है। उन्होंने बताया कि आयोडीन नाम की एक दवाई है। इसे साउथ एमसीडी 43.22 रुपये में खरीद रही है, जबकि इसी दवा का रेट ईस्ट व नॉर्थ एमसीडी ने 13.44 रुपये कोट किया है। तीनों एमसीडी के रेट में करीब 223 प्रतिशत का अंतर है। इसी तरह से हाई ब्लड शूगर कंट्रोल करने के लिए दी जाने वाली मेटफोरमिन (500 एमजी) टैबलेट साउथ एमसीडी 63.2 रुपये के रेट से खरीद रही है। वहीं, नॉर्थ और ईस्ट एमसीडी इसी दवा को 28.56 की दर से खरीद रही है। यानी साउथ एमसीडी ने जो रेट कोट किया है, वह बाकी दोनों एमसीडी से 121 प्रतिशत अधिक है। कम सुनाई देने या कानों में किसी अन्य तरह की समस्या होने पर बेटाहिसटाइन नामक दवा दी जाती है। इस दवा को साउथ एमसीडी 504 रुपये की दर से खरीद रही है। वहीं, ईस्ट और नॉर्थ एमसीडी ने इसे 108 रुपये की दर से खरीदने के लिए टेंडर किया है। प्रधानमंत्री जन औषधालय योजना के तहत इंसुलिन 60.82 रुपये में खरीदी जा रही है और साउथ एमसीडी ने इसे 87.78 रुपये में खरीदने के लिए टेंडर किया है।

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