ड्रोन ले जाएगा ‘दिल’

नई दिल्ली। देश में एक शहर से दूसरे शहर मानव अंग खासकर दिल को ले जाने की प्रक्रिया बेहद जटिल और बोझिल है। मात्र २५० ग्राम के दिल को 25 किलोग्राम के एक बक्से में बर्फ के साथ पैक किया जाता है और दान करने वाले के शरीर से निकाले जाने के बाद इसका चार घंटे के भीतर ग्रहण करने वाले के पास पहुंचना जरूरी है। अगर विमान छोटा है और बक्सा सामान रखने के लिए ऊपर बनी जगह में नहीं आ रहा है तो फिर टिकट लेकर इसे सीट पर रखा जाता है। यही वजह है कि अंग प्रत्यारोपण से जुड़े सभी पक्ष डॉक्टर, अस्पताल, मरीज और उनके परिवार चाहते हैं कि अंगों को एक जगह से दूसरे जगह ले जाने की प्रक्रिया बेहतर होनी चाहिए। इसे आसान बनाने की जरूरत है।  भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलूरु में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर बी गुरुमूर्ति की अगुआई में शोधकर्ताओं की एक टीम इसी कोशिश में जुटी है। दुनिया में पहली बार एक ऐसा बक्सा विकसित किया जा रहा है जिसमें ड्रोन के जरिये मानव अंगों को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाया सकता है। अगर ड्रोन के जरिये मानव अंग ले जाना संभव हुआ तो फिर इसमें लगने वाले समय में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। अनाधिकारिक तौर पर इसे ‘लाइफ बॉक्स’ नाम दिया गया है। इससे मानव अंग लेने जाने के लिए उपलब्ध समय भी दोगुना हो जाएगा क्योंकि नया उपकरण दिल को आठ घंटे तक सही स्थिति में रखेगा।
अंगों को सुरक्षित रखने की मौजूदा व्यवस्था में थर्मोइलेक्ट्रिक कूलिंग का इस्तेमाल होता है जिसमें बहुत सारी ऊर्जा की जरूरत होती है। यही वजह है कि बक्से का वजन बढ़ जाता है। आईआईएससी के शोधकर्ता रेफ्रिजरेंट के लिए शुष्क बर्फ का इस्तेमाल कर रहे हैं और उन्होंने दिल को स्वस्थ तथा प्रत्यारोपण के लिए फिट रखने के लिए अधिकतम तापमान चार से छह डिग्री सेल्सियस रखने के वास्ते एक अनूठी नियंत्रण प्रणाली विकसित की है।  लाइफ बॉक्स दिल में गैर ऑक्सीजनयुक्त कार्डियोप्लेजिक सॉल्यूशन पंप करके इसका जीवन और बढ़ा देता है। यह सिस्टम ओपन लूप है, यानी एक बार दिल में पंप किए जाने के बाद यह सॉल्यूशन दोबारा परिसंचरण के बजाय एक अपशिष्टï जलाशय में जमा होता है। बक्सा दिल का पीएच डेटा भेजता है जिससे दूर बैठा हृदय रोग विशेषज्ञ यह तय कर सकता है कि कितनी देर बार दिल में सॉल्यूशन डाला जा सकता है। गुरुमूर्ति ने कहा कि अगर सबकुछ सही रहा तो उनका उपकरण अगले दो साल में काम करने लगेगा। एक बार यह सफल हो गया तो फिर कीमत से लिहाज से इसे व्यावहारिक बनाना कोई बड़ी बात नहीं होगी।

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