प्राधिकण ने जीएसटी में कमी के बाद अब दवा कंपनियों को दिए नए निर्देश

नई दिल्ली। औषधि मूल्य विनियामक ने दवा और चिकित्सा उपकरण निर्माताओं से उन उत्पादों की कीमतें घटाने के कहा है जिनपर उपभोक्ताओं के लाभ के लिए हाल में मला एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कटौती की गयी है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने एक अधिसूचना में कहा कि कर की दरों में बदलाव का विभिन्न दवाओं एवं फॉर्मूलेशन के अधिकतम खुदरा मूल्यों (एमआरपी) के निर्धारण पर असर पड़ा है। दवा मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) के अनुसार दवाओं और फॉर्मूलेशन की एमआरपी में कर शामिल हैं। इसलिए कर या जीएसटी दरों में की जाने वाली किसी भी तरह की कटौती एमआरपी में भी नजर आनी चाहिए और कमी का लाभ उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए।

एनपीपीए ने कहा, “इन चीजों को ध्यान में रखते हुए सभी विनिर्माताओं एवं विपणन कंपनियों से उन दवाओं/फॉर्मूलेशन की एमआरपी में बदलाव करना अपेक्षित है जिनके लिए संशोधित जीएसटी दर लागू करते हुए कर/जीएसटी दरों में कटौती की गयी है।”नियामक ने कहा कि अगर विनिर्माता एक संशोधित मूल्य सूची जारी कर खुदरा स्तर पर कीमतों में कमी का अनुपालन करने में सक्षम हैं तो पहले से बाजार में भेज दिए गए कंटेनर या पैक पर नयी कीमत का स्टीकर लगाना अनिवार्य नहीं होगा।

एनपीपीए नियंत्रित थोक दवाओं एवं फॉर्मूलेशन की कीमतों का निर्धारण एवं संशोधन करता है और देश में दवाओं की कीमतें तथा उपलब्धता की जिम्मेदारी संभालता है।गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 12 जून को हुई जीएसटी परिषद की 44वीं बैठक में कोविड-19 के इलाज में काम आने वाली दवाओं रेमडेसिविर और टोसिलिजुमैब तथा ऑक्सीजन कन्सनट्रेटर एवं अन्य उपकरणों पर कर की दर को घटाया गया है।

वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने 14 जून को हैंड सैनिटाइजर, पल्स ऑक्सीमीटर, बीआईपीएपी मशीन, परीक्षण किट, एम्बुलेंस और तापमान मापने वाले उपकरणों पर भी जीएसटी में कटौती को लेकर अधिसूचना जारी की थी। कुल 18 उत्पादों पर जीएसटी दर में कमी की गयी। कर की ये रियायती दर 30 सितंबर, 2021 तक लागू रहेंगी। परिषद ने टोसिलिजुमैब और एम्फोटेरिसिन बी पर कर को समाप्त करने का भी फैसला किया था। अभी इनपर पांच प्रतिशत कर लगता था। रेमडेसिविर और हेपारिन पर भी जीएसटी की दर 12 से घटाकर पांच प्रतिशत की गई है।

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