53 दवा कंपनियों में स्वास्थ्य विभाग की तीन ने मारे छापे, निरीक्षण के दौरान दस इकाईयों में पाई गई अनियमितताएं

सोलन। हिमाचल के दवा उद्योगों में निर्मित की जा रही दवाओं के नशे के लिए हो रहे दुरुपयोग को रोकने के मकसद से स्टेट ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन एकशन मोड़ पर आ गया है। इसी कड़ी में उन तमाम दवा निर्माता उद्योगों पर औचक निरिक्षण कर शिकंजा कसा जा रहा है, जिनमें निर्मित दवाओं का नशे के लिए दुरुपयोग होने की संभावना है। बीते एक सप्ताह के अरसे में स्टेट ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन दवारा गठित पांच टीमों ने सोलन, बीबीएन, ऊना, सिरमौर और कांगड़ा जिला में स्थित 53 दवा निर्माता इकाईयों का गहन निरीक्षण किया, जिनमें से 10 इकाइयों में अनियमितताए पाई गई है।

इनमें बीबीएन की नौ व कालाअंब की एक इकाई शामिल है। स्टेट ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए बीबीएन स्थित दो दवा निर्माण इकाईयों में तत्काल प्रभाव से उत्पादन बंद करने के आदेश जारी कर दिए है । इसके अलावा दो दवा उद्योगों में दवाओं के स्टॉक को फ्रिज कर दिया गया है, जबकि 6 दवा कंपनियों को रिकार्ड पेश करने के लिए नोटिस थमाया गया हैं। फिलवक्त स्टेट ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन की इस कार्रवाई ने तमाम दवा उद्योगों में हड़कंप मचा दिया है।

राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाह ने बताया कि प्रदेश मेें दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने एवं इनके दुरुपयोग को रोकने के लिए दवा उत्पादन एवं इनके विक्रय के समय पर विस्तृत पग उठाए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा इस संबंध में जारी अधिसूचना के अनुरूप विस्तृत मानक परिचालन प्रक्रिया तैयार की गई है। इस एसओपी के अनुसार उत्पाद लाइसेंस के लिए आवेदन करते समय दवा निर्माता को लाइसेंस प्राधिकारी के समक्ष दवा विक्रेता के साथ किया गया समझौता एवं दवा लाइसेंस प्रस्तुत करना अनिवार्य है। राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाह ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल को सर्वश्रेष्ठ दवा निर्माता हब बनाने के लिए कृतसंकल्प है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए दवा नियंत्रक के माध्यम से आवश्यक पग उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मानक परिचालन प्रक्रिया की अनुपालना के साथ-साथ नियमित निरीक्षण भी किए जा रहे हैं।

यहां उल्लेखनीय है कि नशीले पदार्थों के रूप में दवाओं के दुरुपयोग के खतरे को रोकने के लिए हिमाचल ने पहले ही कई एहतियाती कदम उठाए हैं। इनमेंं सितंबर 2016 से चार दवाओं स्यूडोफेड्रिन, एफेड्रिन, डिफेनोक्सिलेट और ब्यूप्रेनोर्फिन के निर्माण पर प्रतिबंध लगाना शामिल है। इस कार्य में आवश्यकतानुसार पुलिस की सहायता ली जा रही है। उन्होंने कहा कि दवा गुणवत्ता एवं दवा संयोजन के नशीली दवाओं के रूप में दुरुपयोग को रोकने के लिए मार्च 2019 से राज्य में प्रदेश एवं जिला स्तर पर संयुक्त कार्यबल गठित किया गया है। इस कार्यबल में प्रदेश पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो तथा प्रदेश दवा नियंत्रण प्रशासन के अधिकारियों को शामिल किया गया है। यह कार्यबल ऐसे सभी दवा निर्माता स्थलों का निरीक्षण सुनिश्चित बना रहा है, जहां दवा संयोजन का दुरुपयोग हो सकता है।

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