भोपाल: एम्स भोपाल आंखों की सेहत के लिए एक अनोखी पहल शुरू करने जा रहा है। विश्व दृष्टि दिवस के मौके पर 8 अक्टूबर को संस्थान ‘आई हेल्थ पासपोर्ट’ जारी करेगा। इस पासपोर्ट में मरीज की आंखों की जांच से जुड़े जरूरी आंकड़े एक ही जगह सुरक्षित रखे जा सकेंगे, ताकि आगे इलाज में डॉक्टरों को आसानी हो।
पहले 100 मरीजों को मिलेगा लाभ
इस पहल के तहत नेत्र ओपीडी में पहुंचने वाले मध्यप्रदेश के मूल निवासी पहले 100 मरीजों को आई हेल्थ पासपोर्ट दिया जाएगा। इन मरीजों को पर्चा बनवाने के लिए लंबी लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। वे सीधे वॉक-इन के जरिए नेत्र ओपीडी में पहुंचकर अपनी जांच करा सकेंगे। एम्स के नेत्र रोग विशेषज्ञों ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम में यह जानकारी दी।
तीन जांचें होंगी पूरी तरह मुफ्त
पहले 100 मरीजों की आंखों की तीन अहम जांचें नि:शुल्क की जाएंगी:
- विजन टेस्ट: इससे देखने की क्षमता और चश्मे के नंबर का शुरुआती अंदाजा मिलेगा।
- एनसीटी (नॉन-कॉन्टैक्ट टोनोमेट्री): इसमें बिना आंख को छुए उसके अंदर का दबाव मापा जाता है। यह जांच ग्लूकोमा यानी काला पानी की शुरुआती पहचान में बहुत उपयोगी है।
- ऑटोरैफ: मशीन के जरिए आंखों के दृष्टि दोष और रिफ्रैक्शन की स्वचालित जांच होगी।
जांच में किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर मरीज को आगे विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श की सलाह दी जाएगी।
स्क्रीन टाइम से बढ़ रही आंखों की समस्याएं
विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी की स्क्रीन पर लगातार नजरें टिकाए रखने से लोगों में आंखों की थकान, जलन और धुंधला दिखने की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं। ज्यादातर लोग तब तक आंखों की जांच नहीं कराते, जब तक परेशानी गंभीर न हो जाए। इसी आदत को बदलने और नियमित नेत्र जांच के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए यह पहल शुरू की जा रही है।
एम्स की सलाह: आंखों को स्वस्थ रखने के आसान तरीके
एम्स के विशेषज्ञों ने स्क्रीन का अधिक इस्तेमाल करने वालों को 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह दी है। इसका मतलब है कि हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए लगभग 20 फीट दूर किसी चीज को देखें। इसके अलावा:
- साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर कराएं।
- भरपूर नींद लें और भोजन में हरी सब्जियां, फल व सूखे मेवे शामिल करें।
- तेज धूप में यूवी सुरक्षा वाला चश्मा पहनें।
- पढ़ते या स्क्रीन देखते समय उचित दूरी और पर्याप्त रोशनी रखें।
- आंखों में लगातार जलन, धुंधलापन या दर्द हो तो खुद दवा डालने के बजाय नेत्र विशेषज्ञ को दिखाएं।
एम्स भोपाल की यह पहल नियमित नेत्र जांच को आदत बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में इसे और मरीजों तक बढ़ाया जा सकता है।
स्रोत: पीपुल्स अपडेट (2 अक्टूबर 2026)










