सुलतानपुर (उत्तर प्रदेश): सुलतानपुर जिले में एक निजी क्लीनिक में प्रसव के दौरान नवजात शिशु की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। चांदा कस्बे में चल रहे ‘न्यू आयुषी पॉलीक्लीनिक’ में अनियमितताएं मिलने पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने उसे सील कर दिया है। प्रसूता की हालत बिगड़ने पर उसे बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सीएचसी से निजी क्लीनिक भेजे जाने का आरोप
अधिकारियों के अनुसार, प्रतापगढ़ जिले की रहने वाली एक गर्भवती महिला चांदा कस्बे में अपने मायके आई हुई थीं। शुक्रवार को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजन उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले गए। परिजनों का आरोप है कि वहां मौजूद चिकित्सक ने उन्हें निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दी, जिसके बाद एक आशा कार्यकर्ता उन्हें कस्बे के इस पॉलीक्लीनिक में ले गई।
परिजनों का कहना है कि क्लीनिक में इलाज में देरी की गई, जिससे नवजात की मौत हो गई और प्रसूता की तबीयत गंभीर हो गई।
क्लीनिक में हंगामा, डॉक्टर से मारपीट
घटना से गुस्साए परिजनों ने क्लीनिक में जमकर हंगामा किया और वहां मौजूद चिकित्सक के साथ मारपीट की। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह डॉक्टर को भीड़ से बचाया और अपने साथ ले गई। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। परिजनों ने थाने में लिखित शिकायत दी है।
लम्भुआ के पुलिस क्षेत्राधिकारी रितिक कपूर ने बताया कि नवजात के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
पिछले साल भी सील हुआ था यही क्लीनिक
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह क्लीनिक पहले भी स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई झेल चुका है। अधिकारियों के मुताबिक, पिछले साल 30 अक्टूबर को उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने आयुषी पॉलीक्लीनिक पर छापा मारा था। उस समय क्लीनिक चलाने वाले दोनों डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं मिले थे, जिसके बाद इसे सील कर दिया गया था। अब सवाल उठ रहा है कि सील होने के बाद यह क्लीनिक दोबारा कैसे चलने लगा।
ग्रामीण इलाकों में अवैध क्लीनिकों पर सवाल
यह घटना ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में चल रहे निजी क्लीनिकों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रसव जैसे संवेदनशील मामलों में प्रशिक्षित स्टाफ, जरूरी उपकरण और आपात सुविधा का होना बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ गर्भवती महिलाओं के परिजनों को सलाह देते हैं कि प्रसव के लिए हमेशा पंजीकृत सरकारी अस्पताल या मान्यता प्राप्त निजी अस्पताल ही चुनें। किसी क्लीनिक में भर्ती कराने से पहले उसका पंजीकरण और वहां डॉक्टर की मौजूदगी जरूर जांच लें। अगर कोई सरकारी स्वास्थ्य कर्मी किसी खास निजी अस्पताल में जाने का दबाव बनाए, तो इसकी शिकायत मुख्य चिकित्सा अधिकारी से की जा सकती है।
फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों मामले की जांच कर रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की असली वजह साफ होने की उम्मीद है।
स्रोत: भाषा, दिप्रिंट हिंदी के माध्यम से (3 अक्टूबर 2026)



