अमरोहा (उत्तर प्रदेश): मौसम में बदलाव के साथ अमरोहा जिले में बुखार का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। पिछले एक महीने में बुखार से 10 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। कई मरीजों में प्लेटलेट्स गिरने के साथ डेंगू, मलेरिया और स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण मिल रहे हैं। जांच में अब तक डेंगू के सात मरीजों की पुष्टि हुई है।
50 गांव अतिसंवेदनशील घोषित
हालात को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 50 गांवों को अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा है। ब्लॉकवार देखें तो अमरोहा शहर के 18, जोया के 13, अमरोहा ग्रामीण और गजरौला के 7-7, धनौरा और हसनपुर के 5-5 तथा गंगेश्वरी के 3 गांव इस सूची में शामिल हैं। इन गांवों में विशेष निगरानी और दवा छिड़काव कराया जा रहा है।
ओपीडी में रोज 6 से 7 हजार मरीज
जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी में रोजाना छह से सात हजार मरीज पहुंच रहे हैं। वायरल बुखार, खांसी-जुकाम और अन्य मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिला अस्पताल में फिलहाल बुखार के 28 मरीज भर्ती हैं, जिनमें 15 बच्चे और 13 वयस्क हैं। सामान्य मरीजों को जांच के बाद दवा देकर घर भेजा जा रहा है, जबकि तेज बुखार वाले मरीजों को भर्ती कर निगरानी में इलाज किया जा रहा है।
सीएमओ ने दिए छिड़काव के निर्देश
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमाकांत सागर ने सभी चिकित्सा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में दवाओं का छिड़काव कराने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य टीमें गांवों में जाकर बुखार के मरीजों की पहचान और जांच कर रही हैं।
बुखार में इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों के अनुसार, मौसमी बुखार आमतौर पर कुछ दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ लक्षण गंभीर बीमारी की ओर इशारा करते हैं। अगर बुखार तीन दिन से ज्यादा रहे, या इसके साथ सांस फूलना, बेहोशी, लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, मसूड़ों या नाक से खून आना, पेशाब कम होना या बहुत ज्यादा कमजोरी हो, तो मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। बच्चों में सुस्ती, खाना-पीना छोड़ देना और दौरे पड़ना खतरे के संकेत हैं।
बचाव के लिए क्या करें
- घर और आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर और टंकियों को साफ रखें।
- सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और पूरी बांह के कपड़े पहनें।
- बुखार होने पर झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाने के बजाय सरकारी अस्पताल में जांच कराएं।
- मरीज को खूब पानी, ओआरएस और तरल पदार्थ दें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें।
जिले में लगातार हो रही मौतों से ग्रामीणों में चिंता है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि समय पर जांच और इलाज से गंभीर स्थिति को रोका जा सकता है।
स्रोत: अमर उजाला (3 अक्टूबर 2026)










