लखनऊ (यूपी)। दवा कंपनियों पर लगा जुर्माना वसूलने में सरकार नाकाम रही है। मरीज दवा की कीमत को लेकर भी लूट रहा है। दवाओं की खरीद कीमत से कई गुना ज्यादा वसूलने के मामले सामने आए हैं। कुछ दवाओं की एमआरपी अस्पताल की खरीद कीमत से 67 गुना तक ज्यादा मिली। कर्नाटक में कुछ दवाओं की कीमत 52 गुना तक ज्यादा मिली है।
दवाओं पर ज्यादा कीमत वसूलने का यह खेल नया नहीं है। मार्च 2026 तक दवा कंपनियों से ज्यादा वसूली के मामलों में 10.29 करोड़ जुर्माना लगाया गया। इसमें से केवल 1,582.4 करोड़ रुपये ही वसूले जा सके हैं। यानी करीब 84 फीसदी यानी 8,447.4 करोड़ अब भी बाकी हैं। कार्रवाई होने के बाद कंपनियां कई मामलों को अदालत में चुनौती दे देती हैं। इसके चलते बड़ी रकम वर्षों तक वसूली में अटकी रहती है।
5,872.6 करोड़ रुपये की रकम ऐसे मामलों में फंसी है। इन्हें कंपनियों ने अदालत में चुनौती दी है। या वसूली अधिकारी के स्तर पर विवादित हैं। बकाया रकम में सबसे बड़ा हिस्सा मुकदमेबाजी में फंसा है। करीब 5,872.6 करोड़ रुपये के मामले कानूनी प्रक्रिया में हैं। वहीं 2,369.3 करोड़ ज्यादा वसूली के मामलों की प्रक्रिया में लंबित हैं। करीब 200 करोड़ रुपये वसूली अधिकारी के पास अटके हैं। यानी सरकार की कार्रवाई के बावजूद हजारों करोड़ रुपये वापस नहीं आ पा रहे हैं।





