हैदराबाद। अंडाणु दान से जुड़े कथित रैकेट का खुलासा हुआ है। पुलिस ने अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। आरोप है कि महिलाओं को भर्ती कर उनका व्यावसायिक शोषण किया जा रहा था। इस मामले में आठ लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं 43 महिलाओं को रेस्क्यू किया गया है। आईवीएफ और फर्टिलिटी सेंटरों की मदद से महिलाओं का व्यावसायिक शोषण किया जा रहा था।
यह है मामला
पुलिस ने बेगमपेट और सरूरनगर में कई जगह छापेमारी की। पता चला कि महिलाओं को अंडाणु दान के प्रत्येक चक्र के लिए 20 हजार से 30 हजार रुपये देने का लालच देकर हैदराबाद बुलाया जाता था। एजेंटों के जरिए उनकी भर्ती की जाती थी। फिर उन्हें शहर लाकर किराये के मकानों में ठहराया जाता था। इसके बाद उन्हें फर्टिलिटी से जुड़ी सेवाएं देने वाले केंद्रों तक पहुंचाया जाता था। कुछ महिलाओं ने बताया कि प्रक्रिया की तैयारी के लिए उन्हें हार्मोनल इंजेक्शन और दवाएं दी गई थीं।
पुलिस ने छापेमारी के दौरान ह्यूमोग एचपी 150 आईयू इंजेक्शन की पांच शीशियां, एक सिरिंज, दो सुइयां, प्रिमोलट और मेप्रेट टैबलेट बरामद की हैं। इसके अलावा दस्तावेज, मोबाइल फोन और अन्य सामग्री भी जब्त की गई है। संदेह है कि कुछ प्रक्रियाएं अधिकृत चिकित्सकीय निगरानी के बिना कराई गईं। जैव चिकित्सा कचरे के निस्तारण से जुड़े नियमों का भी उल्लंघन हुआ है। इस मामले में गिरफ्तार किए लोगों में अमित शर्मा को नेटवर्क का कथित मुख्य संचालक बताया जा रहा है। निक्कत परवीन पर सह-संचालक और भर्ती करने वाले की भूमिका निभाने का आरोप है।
रेशमा खातून कथित तौर पर आईवीएफ एजेंट या सब-एजेंट के रूप में काम करती थी। मेघावत श्रीनिवास उर्फ सोनू पर चिकित्सा संबंधी व्यवस्थाओं में समन्वय करने का आरोप है। गिरफ्तार अन्य लोगों में जेप्रे प्रदीप, एसके परवीन, की भूमिका की जांच की जा रही है। विजय भागवाह राव सालुंके और पंकज सोनी इसमें शामिल हैं। इसके अलावा कारोबारी एमिरीशेट्टी दुर्गा प्रसाद को भी गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।





