दक्षिण अफ्रीका के स्ट्रेन पर पूरी तरह प्रभावी नहीं है वैक्सीन, Pfizer का दावा

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के अलग-अलग देशों से आ रहे नए स्ट्रेन दुनियाभर के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के सामने नई चिंता खड़ी कर दी है। भारत में भी ब्रीटेन, ब्राजिल और दक्षिण अफ्रीका से कोरोना के नए स्ट्रेन के मामले सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि दक्षिण अफ्रीका से वायरस से आया ये स्ट्रेन ब्रिटेन के स्ट्रेन से भी कई ज्यादा प्रभावी है। इससे पहले मंगलवार को ICMR की ओर से भी ये बताया गया था कि दक्षिण अफ्रीका का स्ट्रेन यूके और ब्राजील के स्ट्रेन से अलग है। वहीं एक स्टडी में ये भी पता चला है कि ये स्ट्रेन एंटीबॉडी को भी धोखा दे सकता है। ऐसे में ये स्ट्रेन उन लोगों को फिर संक्रमित कर सकता है जो एक बार पहले भी संक्रमित हो चुके हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस स्ट्रेन से संक्रमित होने वाले लोगों में करीब 48 फीसदी लोग ऐसे हैं जो पहले भी संक्रमित हो चुके हैं। वहीं दूसरी ओर खबर है कि भारत के दो कोरोना वैक्सीन Covishield और Covaxin का भी एक बार फिर परीक्षण किया जाएगाऔर ये पता लगाया जाएगा कि इन वैक्सीन में ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका से आए स्ट्रेन से भी लड़ने की क्षमता है या नहीं। जानकारी के मुताबिक दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के इन स्ट्रेन को लेकर वैज्ञानिक पहले से ही सतर्क हो चुके हैं।

मंगलवार को द इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने इस बात का ऐलान किया था कि पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में नए स्ट्रेन को आइसोलेट करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो गई है। अब इस बीच अमेरिकी फार्मा कंपनी Pfizer की ओर से एक खुलासा किया गया है। एक स्टडी के मुताबिक बताया जा रहा है कि दक्षिण अफ्रीका का नया स्ट्रेन Pfizer की वैक्सीन का प्रभाव भी कम कर सकता है।

इस स्टडी में ये भी बताया गया है कि ये साफ नहीं है कि Pfizer की वैक्सीन इस स्ट्रेन के खिलाफ लड़ने में पूरे तरीके से सफल होगी या नहीं। इससे पहले बताया जा रहा था कि Pfizer और जर्मन जैवप्रौद्योगिकी कंपनी BioNTech की ओर से संयुक्त रूप से निर्मित कोविड-19 टीका दक्षिण अफ्रीका के स्ट्रेन पर प्रभावी है। हालांकि अब दूसरी स्टडी में ये बताया गया है कि ये बात पूरे दावे के साथ नहीं कही जा सकती।

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